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महाभारत: कौन आंखे खोलकर सोता है, जन्म लेने पर कौन हिलता-डुलता नहीं है? यक्ष ने युधिष्ठिर से पूछे थे ये सवाल

कौरवों से जुएं में हारने के बाद पांडवों को वनवास में जाना पड़ा। एक दिन पांडव वन में घूमते-घूमते थक गए और उन्हें प्यास लगी। पानी की तलाश में वह 1 तालाब के पास पहुंचे जहां युधिष्ठिर को छोड़कर 1-1 कर के सारे पांडवों की मृत्य हो गई। तब यक्ष के रूप में यमराज ने युधिष्ठिर की परीक्षा ली। 

Mahabharat Yaksha asked Yudhishthira these questions KPI
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Ujjain, First Published Jan 6, 2021, 11:55 AM IST
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उज्जैन. कौरवों से जुएं में हारने के बाद पांडवों को वनवास में जाना पड़ा। एक दिन पांडव वन में घूमते-घूमते थक गए और उन्हें प्यास लगी। तब युधिष्ठिर ने नकुल को पानी लेने भेजा। नकुल ने जल्दी ही एक तालाब खोज लिया। नकुल भी प्यास के कारण बेहाल था, इसलिए तालाब पर पहुंचते ही पानी पीने लगा। तभी वहां एक आकाशवाणी हुई कि- पानी पीने से पहले तुम्हें मेरे सवालों के जवाब देना होंगे। नकुल ने इस आवाज की ओर ध्यान नहीं दिया और पानी पी लिया। पानी पीते ही नकुल वहीं गिर पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई। यही हाल सहदेव, भीम और अर्जुन का भी हुआ।

अंत में जब युधिष्ठिर उस तालाब पर पहुंचे तो अपने भाइयों को मृत अवस्था में देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ। ये रहस्य जानने के लिए युधिष्ठिर जैसे ही तालाब के पास गए, उन्हें भी वही आकाशवाणी सुनाई दी। युधिष्ठिर के पूछने पर आकाशवाणी ने कहा कि इस तालाब के पानी पर मेरा यानी यक्ष का अधिकारी है। यहां से पानी लेने से पहले मेरे सवालों के जवाब देना होंगे।
युधिष्ठिर ने यक्ष के सभी सवालों के सही जवाब दे दिए। इससे यक्ष प्रसन्न हुआ और उसने चारों मृत पांडवों को भी पुन: जीवित कर दिया। वास्तव में वह यक्ष न होकर स्वयं यमराज थे, जो युधिष्ठिर की परीक्षा ले रहे थे। जानिए यक्ष के रूप में यमराज ने क्या सवाल पूछे और युधिष्ठिर ने उनके क्या जवाब दिए…

यक्ष- पृथ्वी से भी भारी क्या है? आकाश से भी ऊंचा क्या है? वायु से भी तेज चलने वाला क्या है? तिनकों से भी अधिक संख्या में क्या है?

युधिष्ठिर- पृथ्वी से भी भारी यानी बढ़कर है मां। आकाश से ऊंचे हैं पिता। मन वायु से तेज चलता है और चिंता की संख्या तिनकों से भी अधिक है।

यक्ष- सो जाने पर पलक कौन नहीं मुंदता है? उत्पन्न होने पर चेष्टा कौन नहीं करता? हृदय किसमें नहीं है? वेग से कौन बढ़ता है?

युधिष्ठिर- मछली सो जाने पर भी पलक नहीं मुंदती है। अंडा उत्पन्न होने पर भी चेष्टा नहीं करता। पत्थर में हृदय नहीं है और नदी वेग से बढ़ती है।

यक्ष- विदेश में जाने वाले का मित्र कौन है? घर में रहने वाले का मित्र कौन है? रोगी का मित्र कौन है? मृत्यु के करीब पहुंचे व्यक्ति का मित्र कौन है?

युधिष्ठिर- विदेश में जाने वाले के मित्र सहयात्री (साथ में जाने वाले लोग) होते हैं। घर में जीवन साथी मित्र होता है। रोगी का मित्र होता है वैद्य। मृत्यु के करीब पहुंचे व्यक्ति का मित्र है दान।

यक्ष- समस्त प्राणियों का अतिथि कौन है? सनातन धर्म क्या है? अमृत क्या है? यह सारा जगत क्या है?

युधिष्ठिर- अग्नि समस्त प्राणियों के लिए अतिथि है। नष्ट न होना वाला नित्य धर्म ही सनातन धर्म है। गौ यानी गाय का दूध अमृत है। यह सारा जगत वायु है।

यक्ष- अकेला कौन विचरता है? एक बार उत्पन्न होकर पुन: कौन उत्पन्न होता है? शीत (ठंड) की औषधि क्या है?

युधिष्ठिर- सूर्य अकेला विचरता है। चंद्रमा एक बार जन्म लेकर पुन: जन्म लेता है। शीत की औषधि अग्नि है।

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