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14 मई को इस विधि से करें भगवान परशुराम की पूजा, जानिए महत्व और शुभ मुहूर्त

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को परशुराम जयंती मनाई जाती है। इस बार ये पर्व 14 मई, शुक्रवार को है। भगवान परशुराम का जन्म त्रेता युग में ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के घर हुआ था।

On May 14, worship Lord Parashuram with this method, know the importance and auspicious time KPI
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Ujjain, First Published May 13, 2021, 1:13 PM IST
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उज्जैन. भगवान परशुराम भार्गव वंश में भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं। परशुराम जयंती पर उनके भक्त उपवास करते हैं और विधि- विधान से भगवान परशुराम की पूजा करते हैं। आगे जानिए परशुराम जयंती का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि…

परशुराम जयंती का महत्व
हिंदू धर्म के अनुसार भगवान परशुराम ने ब्राह्माणों और ऋषियों पर होने वाले अत्याचारों का अंत करने के लिए जन्म लिया था। कहते हैं कि परशुराम जयंती के दिन पूजा-पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व होता है। जिन लोगों की संतान नहीं है उन लोगों को इस व्रत को करना चाहिए, इससे उनकी मनोकामना पूरी हो सकती है।

पूजा-विधि
- वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सूर्योदय से पहले पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। अगर आपके आसपास नदी नहीं है तो पानी की बाल्टी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- इसके बाद धूप दीप जलाकर व्रत करने का संकल्प लें। भगवान विष्णु को चंदन लगाकर विधि-विधान से उनकी पूजा करें। फिर भगवान को भोग लगाएं।
- आप चाहें तो परशुराम जी के मंदिर जाकर उनके दर्शन भी कर सकते हैं लेकिन कोरोना काल में ऐसा करने से बचें और उन्हें मन में ही याद करें।
- इस दिन व्रत करने वाले लोगों को किसी तरह का कोई अनाज नहीं खाना चाहिए। फलाहार कर सकते हैं।

शुभ मुहूर्त
वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि आरंभ- 14 मई 2021 (शुक्रवार) सुबह 05 बजकर 40 मिनट पर
वैशाख शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि समाप्त- 15 मई 2021 (शनिवार) सुबह 08 बजे

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