उज्जैन. पाम संडे यानी ईस्टर के पूर्व का रविवार को ईसाई धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। इस दिन को ईसाई समुदाय के लोग प्रभु यीशू के यरुशलम में विजयी प्रवेश के रूप में मनाते हैं। इस बार 5 अप्रैल को पाम संडे मनाया जायेगा।

पवित्र बाइबल में कहा गया है कि प्रभु यीशू जब यरुशलम पहुँचे, तो उनके स्वागत में बड़ी संख्या में लोग पाम यानी खजूर की डालियाँ अपने हाथों में लहराते हुए एकत्रित हो गए थे। लोगों ने प्रभु यीशू की शिक्षा और चमत्कारों को शिरोधार्य कर उनका जोरदार स्वागत किया था। यह बात करीब दो हजार वर्ष
पहले की बताई जाती है। उस दिन की याद में पाम संडे मनाया जाता है।

इसे पवित्र सप्ताह की शुरुआत के रूप में भी मनाया जाता है। इसका समापन ईस्टर के रूप में होता है। इस बार ईस्टर 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। पाम संडे दक्षिण भारत में प्रमुखता से मनाया जाता है। इसे पैशन संडे भी कहा जाता है।

इस मौके पर चर्चों में विशेष आयोजन होते हैं। इसमें बाइबल का पाठ, प्रवचन और मीसा का आयोजन भी किया जाएगा। साथ ही एक विशेष आयोजन के साथ शाम को विशेष चल समारोह निकाला जाता है। ईसाई समाज पाम संडे को प्रभु के आगमन की खुशी में गीत गाकर स्वागत करते हैं। पाम संडे से
गिरिजाघरों में शुरू हुआ प्रभु आराधना एवं भक्ति का सिलसिला ईस्टर तक जारी रहेगा।