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तर्पण करते समय हथेली के इस खास हिस्से से ही क्यों दिया जाता है पितरों को जल? जानिए और भी परंपराएं

अभी पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2021) चल रहा है, जो 6 अक्टूबर तक रहेगा। इन दिनों में परिवार के मृत लोगों की मृत्यु तिथि पर तर्पण, पिंडदान आदि पुण्य कर्म किए जाते हैं। पितरों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2021) में रोज तर्पण करना चाहिए। 

Shradh Paksha, know traditions related to tarpan and shradh
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Ujjain, First Published Oct 2, 2021, 5:20 AM IST
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उज्जैन. तर्पण यानी जल अर्पित करके पितरों को तृप्त करना। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार तर्पण करते समय हाथ में जल लेकर अंगूठे की ओर से पितरों को अर्पित किया जाता है। श्राद्ध से जुड़ी और भी कई परंपराएं हैं जैसे कौए, गाय और कुत्ते को भोजन देना आदि। आगे जानिए इन परंपराओं से जुड़ी खास बातें…

अंगूठे से ही क्यों चढ़ाते हैं पितरों को जल?
पं. शर्मा बताते है कि हस्तरेखा ज्योतिष में हथेली में अंगूठे के पास वाले हिस्से को पितृ तीर्थ कहा जाता है। ये हिस्सा पितर देवता से संबंधित होता है। इस कारण इसे पितृ तीर्थ कहते हैं। हथेली में जल लेकर अंगूठे से चढ़ाया गया जल पितृ तीर्थ से होता हुआ पिंडों तक जाता है। इस वजह से पितरों को तर्पण से तृप्ति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

श्राद्ध में कौओं, गाय व कुत्तों को भोजन क्यों दिया जाता है?
- ग्रंथों के अनुसार, कौवा यम का प्रतीक है। इसलिए श्राद्ध का एक अंश इसे भी दिया जाता है। कौओं को पितरों का स्वरूप भी माना जाता है। मान्यता है कि श्राद्ध का भोजन कौओं को खिलाने से पितृ देवता प्रसन्न होते हैं और श्राद्ध करने वाले को आशीर्वाद देते हैं।
- श्राद्ध के भोजन का एक अंश गाय को भी दिया जाता है क्योंकि धर्म ग्रंथों में गाय को वैतरणी से पार लगाने वाली कहा गया है। गाय में ही सभी देवता निवास करते हैं। गाय को भोजन देने से सभी देवता तृप्त होते हैं इसलिए श्राद्ध का भोजन गाय को भी देना चाहिए।
- कुत्ता यमराज का पशु माना गया है, श्राद्ध का एक अंश इसको देने से यमराज प्रसन्न होते हैं। शिवमहापुराण के अनुसार, कुत्ते को रोटी खिलाते समय बोलना चाहिए कि- यमराज के मार्ग का अनुसरण करने वाले जो श्याम और शबल नाम के दो कुत्ते हैं, मैं उनके लिए यह अन्न का भाग देता हूं। वे इस बलि (भोजन) को ग्रहण करें। इसे कुक्करबलि कहते हैं।

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