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वाल्मीकि रामायण: अयोध्या के राजा बनने के बाद श्रीराम दोबारा क्यों गए थे लंका, किसने तोड़ा था रामसेतु?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका पर चढ़ाई करते समय भगवान श्रीराम के कहने पर वानरों और भालुओं ने रामसेतु का निर्माण किया था, ये बात हम सभी जानते हैं। लेकिन जब श्रीराम विभीषण से मिलने दोबारा लंका गए, तब उन्होंने रामसेतु का एक हिस्सा स्वयं ही तोड़ दिया था, ये बात बहुत कम लोग जानते हैं।

Valmiki Ramayana: Why did Shri Ram returned to Lanka after being crowned as Ayodhya King and who destroyed Ramsetu KPI
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Ujjain, First Published Jun 19, 2020, 5:25 PM IST
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उज्जैन. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, लंका पर चढ़ाई करते समय भगवान श्रीराम के कहने पर वानरों और भालुओं ने रामसेतु का निर्माण किया था, ये बात हम सभी जानते हैं। लेकिन जब श्रीराम विभीषण से मिलने दोबारा लंका गए, तब उन्होंने रामसेतु का एक हिस्सा स्वयं ही तोड़ दिया था, ये बात बहुत कम लोग जानते हैं। इससे जुड़ी कथा का वर्णन पद्म पुराण के सृष्टि खंड में मिलता है, जो इस प्रकार है...

श्रीराम इसलिए गए थे लंका
पद्म पुराण के अनुसार, अयोध्या का राजा बनने के बाद एक दिन भगवान श्रीराम को विभीषण का विचार आया। उन्होंने सोचा कि रावण की मृत्यु के बाद विभीषण किस तरह लंका का शासन कर रहे हैं, उन्हें कोई परेशानी तो नहीं है। जब श्रीराम ये सोच रहे थे, उसी समय वहां भरत भी आ गए। भरत के पूछने पर श्रीराम ने उन्हें पूरी बात बताई। ऐसा विचार मन में आने पर श्रीराम ने लंका जाने की सोची। भरत भी उनके साथ जाने को तैयार हो गए। अयोध्या की रक्षा का भार लक्ष्मण को सौंपकर श्रीराम व भरत पुष्पक विमान पर सवार होकर लंका चले गए।

जब श्रीराम से मिले सुग्रीव और विभीषण
पुष्पक विमान से लंका जाते समय रास्ते में किष्किंधा नगरी आई। श्रीराम व भरत थोड़ी देर वहां ठहरे और सुग्रीव व अन्य वानरों से भी मिले। जब सुग्रीव को पता चल कि श्रीराम व भरत विभीषण से मिलने लंका जा रहे हैं, तो वे उनके साथ हो गए। रास्ते में श्रीराम ने भरत को वह पुल दिखाया, जो वानरों व भालुओं ने समुद्र पर बनाया था। लंका जाकर श्रीराम, भरत व सुग्रीव विभीषण से मिले।

श्रीराम ने इसलिए तोड़ा था सेतु
श्रीराम तीन दिन तक लंका में ठहरे और विभीषण को धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया। जब श्रीराम पुन: अयोध्या जाने के लिए पुष्पक विमान पर बैठने लगे तो विभीषण ने उनसे कहा कि- श्रीराम आपने जैसा मुझसे कहा है, ठीक उसी तरह मैं धर्मपूर्वक राज्य करूंगा। लेकिन इस सेतु (पुल) के मार्ग से जब मानव यहां आकर मुझे सताएंगे, उस स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए? विभीषण के ऐसा कहने पर श्रीराम ने अपने बाणों से उस सेतु के दो टुकड़े कर दिए। फिर तीन भाग करके बीच का हिस्सा भी अपने बाणों से तोड़ दिया। इस तरह स्वयं श्रीराम ने ही रामसेतु तोड़ा था।

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