Asianet News Hindi

भोजन करते समय किस दिशा में होना चाहिए मुख? ग्रंथों में बताए गए हैं खाने से जुड़े ये खास नियम

महाभारत, पद्म पुराण, विष्णु पुराण और चरक संहिता सहित अन्य स्मृति ग्रंथों में भोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। इन ग्रंथों के अनुसार भोजन संबंधी नियमों को ध्यान में रखा जाए तो निरोगी रहा जा सकता है।

Which direction should be faced while eating? Know the rules regarding food mentioned in Hindu Literature KPI
Author
Ujjain, First Published Aug 13, 2020, 1:24 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

उज्जैन. इन ग्रंथों के अनुसार भोजन संबंधी नियमों को ध्यान में रखा जाए तो निरोगी रहा जा सकता है। इसके साथ ही लंबी उम्र भी मिल सकती है। हिन्दू मान्यताओं में भोजन करते समय भोजन की सात्विकता का ख्याल रखना जरूरी है। जानिए किस ग्रंथ में क्या कहा गया है भोजन के संबंध में…

1. वशिष्ठ और लघुहारित स्मृति ग्रंथ के अनुसार खाना खाते वक्त पूर्व दिशा की ओर मुंह हो तो उम्र बढ़ती है।
2. वामन पुराण का कहना है कि खाना खाते समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह होता है तो गुस्सा और बुरे विचार बढ़ते हैं। वहीं पश्चिम दिशा की ओर मुंह हो तो रोग बढ़ते हैं।
3. वाधुलस्मृति के अनुसार बिना नहाए खाना खाने से बीमारियां बढ़ती है और ऐसा व्यक्ति धीरे-धीरे आलसी होने लगता है।
4. भविष्य पुराण और वाधुलस्मृति के अनुसार पूर्व दिशा में ही भोजन पकाना चाहिए।
5. महाभारत के अनुशासन पर्व में बताया गया है कि भोजन बनाते समय गुस्सा और तनाव नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही ये भी बताया गया है कि टूटे-फूटे बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए।
6. लघुव्यास संहिता और कूर्म पुराण का कहना है कि लेटकर, खड़े होकर, गीले कपड़ों में और संध्या के समय खाना नहीं खाना चाहिए।
7. कूर्म पुराण के ही अनुसार जूते-चप्पल पहने हुए, बिस्तर पर बैठकर या किसी मंदिर और देव स्थान पर भोजन नहीं करना चाहिए।
8. कूर्म पुराण में ये भी कहा गया है कि न तो रोते हुए या दुखी होकर खाना खाना चाहिए। इसके साथ ही खाना खाते समय हंसना मना है और बातें भी नहीं करना चाहिए।
 

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios