इस बार 22 अगस्त, शनिवार को गणेश चतुर्थी है। इस दिन घर-घर में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और अगले 10 दिनों तक अलग-अलग भोग लगाकर श्रीगणेश को प्रसन्न किया जाएगा। मान्यता है कि भगवान श्रीगणेश को लड्‌डू और मोदक का भोग लगाने से वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं।

उज्जैन. मान्यता है कि भगवान श्रीगणेश को लड्‌डू और मोदक का भोग लगाने से वे जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। श्रीगणेश को मोदक का भोग क्यों लगाया जाता है? इस परंपरा से जुड़ी एक कथा और लाइफ मैनेजमेंट के कईं सूत्र छिपे हैं, जो आज हम आपको बता रहे हैं...

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इसलिए श्रीगणेश को प्रिय हैं मोदक
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार ऋषि अत्रि ने गणेश जी को भोजन पर आमंत्रित किया, अत्रि ऋषि की पत्नी अनुसूया ने गणेश जी के लिए भोजन लगाया, गणेश जी भोजन करने लगे, लेकिन उनकी भूख शांत ही नहीं हो रही थी, अनुसूया को चिंता होने लगी कि यदि गणेश जी तृप्त नहीं हो पाए तो क्या होगा। घर आए अतिथि को बिना तृप्त किए नहीं लौटा सकते। तब अनुसूया जी ने सोचा कि गणेश जी को खाने के लिए कुछ मीठा दिया जाए। गणेश जी को तृप्त करने के लिए अनुसूया ने मोदक दिए, गणेश जी जैसे ही मोदक खातें मीठे मोदक उनके मुंह में जाकर घुल जाते। मोदक खाकर गणेश जी का मन और पेट दोनों भर गए। वे बहुत प्रसन्न हुए।

ये है मोदक से जुड़ा लाइफ मैनेजमेंट
मोदक यानी जो मोद (आनन्द) देता है, जिससे आनन्द प्राप्त हो, संतोष हो, इसका गहरा अर्थ यह है कि तन का आहार हो या मन के विचार वह सात्विक और शुद्ध होना जरुरी है। तभी आप जीवन का वास्तविक आनंद पा सकते हैं। मोदक ज्ञान का प्रतीक है। जैसे मोदक को थोड़ा-थोड़ा और धीरे-धीरे खाने पर उसका स्वाद और मिठास अधिक आनंद देती है और अंत में मोदक खत्म होने पर आप तृप्त हो जाते हैं, उसी तरह वैसे ही ऊपरी और बाहरी ज्ञान व्यक्ति को आनंद नही देता परंतु ज्ञान की गहराई में सुख और सफलता की मिठास छुपी होती है।