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शुभ मुहूर्त: 17 अक्टूबर को करें देवी शैलपुत्री की पूजा, ये है ध्यान मंत्र और संपूर्ण विधि

शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि को मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस बार 17 अक्टूबर, शनिवार को प्रतिपदा तिथि है।

worship Goddess Shailputri on October 17, this is the meditation mantra and the entire method KPI
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Ujjain, First Published Oct 17, 2020, 9:41 AM IST

उज्जैन. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है। इनकी पूजन विधि इस प्रकार है-

इस विधि से करें देवी शैलपुत्री की पूजा

  • सबसे पहले चौकी (बाजोट) पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद गंगा जल या गोमूत्र से शुद्धिकरण करें।
  • चौकी पर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें।
  • इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें।
  • इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें।
  • तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥

अर्थात- देवी वृषभ पर विराजित हैं। शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए।

पहले दिन शैलपुत्री की ही पूजा क्यों?
नवरात्रि के 9 दिन भक्ति और साधना के लिए बहुत पवित्र माने गए हैं। इसके पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं। हिमालय पर्वतों का राजा है। वह अडिग है, उसे कोई हिला नहीं सकता। जब हम भक्ति का रास्ता चुनते हैं तो हमारे मन में भी भगवान के लिए इसी तरह का अडिग विश्वास होना चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुंच सकते हैं। यही कारण है कि नवरात्रि के पहले दिन देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

17 अक्टूबर के शुभ मुहूर्त
शुभ -  सुबह 8:00 से 9:30 तक
चर -  दोपहर 12:30 से 2:00 तक
लाभ -   दोपहर 2:00 से 3:30 तक
अमृत-   दोपहर 3:30 से शाम 5:00 तक

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