9 सितंबर को इस विधि से करें Hartalika Teej का व्रत, ये है शुभ मुहूर्त और कथा

Published : Sep 08, 2021, 10:37 AM IST
9 सितंबर को इस विधि से करें Hartalika Teej का व्रत, ये है शुभ मुहूर्त और कथा

सार

हिन्दू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2021) व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 9 सितंबर, गुरुवार को रखा जाएगा। हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2021) सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।  

उज्जैन. हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2021) पर महिलाएं अखंड सौभाग्य और अपने वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने के लिए व्रत रखती हैं। यह व्रत निर्जल रखा जाता है यानी इस दिन महिलाएं बिना कुछ खाए-पिए व्रत करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2021) व्रत रखती हैं। उनके द्वारा यह व्रत सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। आगे जानिए इस व्रत की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व कथा…
 

हरतालिका तीज मुहूर्त
तृतीया तिथि प्रारंभ - 8 सितंबर, बुधवार को दोपहर 3.59 से
तृतीया तिथि समाप्त - 9 सितंबर, गुरुवार की रात्रि 2.14 मिनट तक
प्रातःकाल पूजा का मुहूर्त - 9 सितंबर, गुरुवार को सुबह 06.03 से 08.33 तक
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त- 9 सितंबर, गुरुवार को शाम 06.33 से रात 08.51 मिनट तक

 हरितालिका तीज (Hartalika Teej 2021) व्रत की विधि
- इस दिन महिलाएं निर्जल (बिना कुछ खाए-पीए) रहकर व्रत करती हैं। इस व्रत में बालूरेत से भगवान शंकर व माता पार्वती का मूर्ति बनाकर पूजा की जाती है।
- घर को साफ-स्वच्छ करें। एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती एवं उनकी सखी की आकृति (प्रतिमा) बनाएं।
- प्रतिमाएं बनाते समय भगवान का स्मरण करें। देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन करें। व्रत का पूजन रात भर चलता है।
- महिलाएं जागरण करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव को सभी प्रकार की वनस्पतियां जैसे बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण किया जाता है। आरती और स्तोत्र द्वारा आराधना की जाती है।
- देवी पार्वती की पूजा के लिए ये मंत्र बोलें- ऊं उमायै नम:, ऊं पार्वत्यै नम:, ऊं जगद्धात्र्यै नम:, ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नम:, ऊं शांतिरूपिण्यै नम:, ऊं शिवायै नम:
- भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करें- ऊं हराय नम:, ऊं महेश्वराय नम:, ऊं शम्भवे नम:, ऊं शूलपाणये नम:, ऊं पिनाकवृषे नम:, ऊं शिवाय नम:, ऊं पशुपतये नम:, ऊं महादेवाय नम:
- पूजा दूसरे दिन सुबह समाप्त होती है, तब महिलाएं अपना व्रत तोड़ती हैं और अन्न ग्रहण करती हैं।

हरतालिका तीज (Hartalika Teej 2021) व्रत कथा
हरतालिका का शाब्दिक अर्थ की बात करें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है हरत और आलिका, हरत का अर्थ होता है अपहरण और आलिका अर्थात् सहेली, इस संबंध में एक पौराणिक कथा मिलती है जिसके अनुसार पार्वती जी की सखियां उनका अपहरण करके जंगल में ले गई थी। ताकि पार्वती जी के पिता उनका विवाह इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न कर दें। अपनी सखियों की सलाह से पार्वती जी ने घने वन में एक गुफा में भगवान शिव की अराधना की। भाद्रपद तृतीया शुक्ल के दिन हस्त नक्षत्र में पार्वती जी ने मिट्टी से शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजा की और रातभर जागरण किया। पार्वती जी के तप से खुश होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था।
 

 

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