ज्येष्ठ मास 8 मई से, जानिए इस महीने में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और त्योहार मनाएं जाएंगे

Published : May 08, 2020, 10:25 AM IST
ज्येष्ठ मास 8 मई से, जानिए इस महीने में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और त्योहार मनाएं जाएंगे

सार

हिंदी पंचांग का तीसरा महीना ज्येष्ठ 8 मई, शुक्रवार से शुरू होगा, जो 5 जून तक रहेगा। इस महीने में गर्मी का मौसम अपने चरम पर रहता है।

उज्जैन. ज्येष्ठ महीने में जल की पूजा भी की जाती है और जल को बचाने का प्रयास किया जाता है। इस बार तिथियों की घट-बढ़ के कारण ये महीना 28 दिनों का रहेगा। जानिए इस महीने में कौन-कौन से प्रमुख व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे-

संकष्टी चतुर्थी - ज्येष्ठ माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश जी की पूजा के लिए ये व्रत किया जाता है। ये व्रत 10 मई को किया जाएगा। संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से हर तरह की परेशानियां दूर हो जाती हैं।
अपरा एकादशी - ज्येष्ठ महीने के कृष्णपक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी या अचला एकादशी भी कहा जाता है। अपरा एकादशी के दिन तुलसी, चंदन, कपूर, गंगाजल सहित भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
शनि जयंती- ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। ग्रंथों के अनुसार इस दिन शनिदेव का जन्म हुआ था। शनि जयंती पर व्रत और शनि पूजा करने से कुंडली में शनि दोष खत्म हो जाते हैं।
वट सावित्री व्रत - ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि वट सावित्रि व्रत भी किया जाता है। इस व्रत पर बरगद के पेड़ की पूजा और परिक्रमा की जाती है। पूजा के बाद सत्यवान और सवित्री की कथा सुनाई जाती है। इस व्रत को करने से पति की उम्र बढ़ती है और परिवार में समृद्धि बढ़ती है।
गंगा दशहरा- गंगा दशहरा एक प्रमुख त्योहार है। ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी को ये व्रत किया जाता है। इस दिन गंगा स्नान और विशेष पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन दान का भी महत्व है। ऐसा करने वाला महापातकों के बराबर के दस पापों से छूट जाता है।
निर्जला एकादशी- हिन्दू कैलेंडर के ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। यह व्रत बिना पानी पीए किया जाता है। इसलिए यह व्रत कठिन तप और साधना के समान महत्त्व रखता है। इस व्रत को करने से हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। निर्जला एकादशी का व्रत करने सालभर की सभी एकादशी का फल मिलता है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा- इस महीने की पूर्णिमा का व्रत और दान करने से सौभाग्य प्राप्त होता है। इस पूर्णिमा पर व्रत करने से संतान सुख भी मिलता है। इस बार ये व्रत 5 जून को किया जाएगा। इसे वट पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भी सत्यवान और सवित्री की पूजा की जाती है और बरगद की पूजा की जाती है।

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