
नई दिल्ली: भारत में नवंबर-दिसंबर में 35 लाख विवाह होने की उम्मीद है. इसके लिए 4.25 लाख करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना है. अखिल भारतीय व्यापारियों के संगठन (कैट) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है. इससे पहले इस साल 15 जनवरी और 15 जुलाई के बीच 42 लाख से ज़्यादा शादियां हुई हैं. सर्वेक्षण में कहा गया है कि इससे अनुमानित ₹5.5 लाख करोड़ का खर्च आया है.
2023-24 में शादी के 60 मुहूर्त थे. लेकिन 24-25 की अवधि में इससे कम (49) मुहूर्त हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल की तुलना में 11 कम मुहूर्त होने के बावजूद शादी का खर्च कम नहीं हुआ है. भारत में हर साल लगभग 1 करोड़ शादी समारोह होते हैं. शादी के बाजार में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.
खर्च क्यों बढ़ रहा है?:
हाल के दिनों में शादी के खर्च में बढ़ोतरी के पीछे लोगों की बदलती प्राथमिकताएं/रुचियां हैं. कई तरह के खाने के काउंटर, ड्रोन से शादी की फिल्मिंग, प्री-वेडिंग फोटो शूट, ऑडियो के ज़रिए न्योता भेजना, ऑर्केस्ट्रा का आयोजन, मेहमानों को खास तोहफे देना, शादी के मंडप को अत्याधुनिक 3डी तकनीक से सजाना- ये नए ज़माने के खर्चे हैं. यही वजह है कि शादी का खर्च बढ़ गया है.
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