
करियर डेस्क। साल 2003 में बर्खास्त एक आईएएस अफसर ने 17 साल के बाद अमेरिका से वापस आने के बाद अपनी नौकरी पर दावा जताया है। बता दें कि वे स्टडी लीव पर 1996 में अमेरिका गए थे और वहां से निश्चित समय के भीतर नहीं लौटे। उनका अध्ययन अवकाश 5 सालों के लिए था। इस आईएएस अधिकारी का नाम राजेश कुमार सिंह हैं। अध्ययन अवकाश पूरा हो जाने के बाद वे अमेरिका की आयोवा यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हो गए। अब 17 साल बाद अमेरिका से वापस आकर उन्होंने अपनी नौकरी पर दावा जताया है, लेकिन उनके दावे को अस्वीकार कर दिया गया है।
प्रधानमंत्री को दिया था प्रेजेंटेशन
आईएएस अधिकारी के पद पर बहाली के लिए राजेश कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री के सामने भी प्रेजेंटेशन दिया, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया। उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में भी अपनी फिर से बहाली किए जाने को लेकर याचिका दाखिल की थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई। सिंह का कहना है कि उन्हें गलत करीके से बर्खास्त किया गया है, लेकिन कैट का कहना है कि स्टडी लीव पर जाने के बाद वे गायब हो गए।
बीएचयू से ली थी इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री
राजेश कुमार सिंह ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) से 1981 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली थी। बाद में उन्होंने मास्टर्स भी किया। 1984 में उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की और आईएएस अधिकारी बन गए। उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला था।
सरकार ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस
लंबे समय तक बिना किसी सूचना के गायब रहने पर सरकार ने जुलाई, 2002 में उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद सितंबर 2002 में उन्हें फिर नोटिस जारी किया गया, जिसके जवाब में उन्होंने लिखा कि वे लीव पर हैं और इसके पहले 17 जुलाई, 2001 को उन्होंने सर्विस ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद 18 जुलाई, 2001 को अर्जित अवकाश लेने के लिए आवेदन दिया था। लेकिन रिकॉर्ड की जांच के बाद यह बात गलत पाई गई। रिकॉर्ड्स की जांच से पता चला कि उन्होंने सर्विस ज्वाइन नहीं की थी।
जारी हुई बर्खास्तगी की अधिसूचना
सभी रिकॉर्ड्स की जांच के बाद सरकार ने राजेश कुमार सिंह की सेवा समाप्त करने का फैसला लिया और 19 मई, 2003 को उनकी बर्खास्तगी की अधिसूचना जारी कर दी गई। इसके बाद भी सिंह ने कोई प्रतिक्रिया नहीं जाहिर की। किसी को इस बारे में भी ठीक से पता नहीं है कि इतने सालों तक क्या वे अमेरिका में अध्यापन ही करते रहे या कोई दूसरा काम भी किया। उनकी वापसी और आईएएस पद पर फिर से दावा किए जाने के पीछे क्या मामला है, इसके बारे में किसी को कोई ठोस जानकारी नहीं है। बहरहाल, प्रधानमंत्री और कैट के द्वारा उनका दावा खारिज कर दिए जाने के बाद क्या वे अब वे ऊंची अदालत में अपील करेंगे, इसे लेकर न तो उनकी वकील ने कुछ कहा है और न ही उन्होंने कोई जवाब दिया।
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