Published : Jul 02, 2020, 06:12 PM ISTUpdated : Jul 03, 2020, 10:29 AM IST
बिजनेस डेस्क। भारत सरकार ने हाल ही में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए चीनी लिंक वाले 59 ऐप को प्रतिबंधित कर दिया। इसमें बाइटडांस की टिकटॉक और हेलो ऐप भी शामिल हैं। इन दोनों ऐप का भारत में तगड़ा यूजर बेस है और कंपनी को इसके जरिए कारोबार में काफी फायदा भी मिलता रहा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने माना है कि इस बैन से अगले कुछ महीनों में बाइटडांस को 45 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है। जाहिर सी बात है कि ऐप पर सक्रिय क्रिएटर्स को भी नुकसान उठाना पड़ेगा।
भारत में टिकटॉक क्रिएटर्स की अच्छी ख़ासी तादाद है जिन्होंने ऐप से जमकर कमाई की। कई तो इसी के जरिए तगड़े फैन बेस से सेलिब्रिटी बनने के साथ करोड़ों रुपये कमाए। हाल में आ रही कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया जा रहा है कि टिकटॉक कई क्रिएटर्स की कमाई का इकलौता जरिया था जो बैन के बाद खत्म हो गया। हालांकि तमाम क्रिएटर्स ने सरकार के फैसले का समर्थन किया है और माना जा रहा है कि वो टिकटॉक जैसे दूसरे ऐप पर अपने फैन बेस के साथ काम शुरू करेंगे।
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चूंकि टिकटॉक चर्चा में है और लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा होगा कि क्रिएटर्स टिकटॉक पर पैसा कैसे बनाते थे और उन्हें पेमेंट कैसे किया जाता था? सबसे पहले पेमेंट के बारे में जान लेते हैं। टिकटॉक पर वीडियो अपलोड करने वाले क्रिएटर्स को सीधे रुपये में पेमेंट नहीं किया जाता है। बल्कि उनके PayPal अकाउंट में PayPalsByteDance के जरिए पे किया जाता है।
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मान लीजिए किसी क्रिएटर को 200 डॉलर यानी करीब 14,987 रुपये देने हैं तो उसे उसके टिकटॉक वालेट में 40,000 "डायमंड" ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। डायमंड टिकटॉक की वर्चुअल ऐप करेंसी है जिसे यूजर सबसे पहले वालेट में पाता है। और उसके बाद लोकल करेंसी (यानी भारतीय रुपया या किसी दूसरे देश की मुद्रा) में बदल लेता है।
फोटो : टिकटॉक सेलिब्रिटी जन्नत।
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टिकटॉक पर हर यूजर पैसे नहीं कमाता है। जिनका फैन बेस (फॉलोअर्स) ठीक-ठाक है, सिर्फ वही मोटी कमाई करते हैं। तगड़े फैनबेस वाले क्रिएटर्स को इंफ्लुएंसर कहा जाता है। इन इंफ्लुएंसर्स के साथ टिकटॉक कांट्रैक्ट करता है। कांट्रैक्ट में पेमेंट भी उनकी फैनफॉलोविंग के आधार पर ही तय होती है। यानी क्रिएटर अपनी लोकप्रियता के आधार पर 100 डॉलर (करीब 7 हजार रुपये से ज्यादा) से 1750 डॉलर (करीब 1,30,747 लाख रुपये) तक हर टर्म मंथ में कमा सकता है। क्रिएटर्स को टिक टॉक लोगों के साथ इंस्टाग्राम पर भी कंटेंट डालना होता है।
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ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक क्रिएटर्स की पेमेंट के लिए चार टियर होते हैं। अब टिकटॉक के भारत में कितने क्रिएटर्स हैं इसके आंकड़े सामने नहीं आए हैं, मगर माना जाता है कि यह संख्या भारत में मंथली एक्टिव कुल यूजर का करीब 10 प्रतिशत है।
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कुछ देर लाइव का कितना पैसा देता है टिकटॉक
टिकटॉक पर हर रविवार दो घंटे लाइव के जरिए एक यूजर 120 डॉलर (करीब 9 हजार रुपये कमा सकता है। लाइव के दौरान क्वाइन्स मिलते हैं। ये क्वाइंस इमोजिस पर फैंस की ओर से मिलते हैं। 100 रुपये 80 क्वाइंस के बराबर होता है। क्वाइंस को क्रिएटर्स बाद में Redeem कर लेते हैं। मजेदार बात यह है कि टिकटॉक पर वही यूजर लाइव कर सकता है जिसके 1000 फॉलोअर हैं।
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टिकटॉक का तगड़ा फैनबेस है। इस वजह से यहां भी यूट्यूब की तरह क्रिएटर को बहुत सारे ब्रांड स्पोनसरशिप देते हैं। लेकिन ये ज़्यादातर इंफ्लुएंसर को ही मिलती है। कीमत डील के आधार पर होती है।
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जब TikTok पर किसी यूजर के बहुत सारे फॉलोअर हो जाते हैं तो वह लोकप्रिय हो जाता है। क्रिएटर को टिकटॉक और सोशल मीडिया पर क्रॉस प्रमोट के लिए कई ब्रांड, संस्थाएं अप्रोच करती हैं। इसके लिए पेमेंट भी किया जाता है। पेमेंट की रकम डील में तय होती है जो क्रिएटर्स की कमाई का बड़ा जरिया है।
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टिकटॉक पर जिनकी अच्छी फॉलोविंग होती है वो खुद अपना एक ई-कॉमर्स स्टोर बना सकते हैं और मर्चेंडाइज़ सेल कर सकते हैं। मर्चेंडाइज़ सेलिंग एमएन कई इंफ्लुएंसर खुद का ब्रांड बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं जबकि कुछ दूसरे ब्रांड को बेच कर प्रॉफ़िट शेयर करते हैं।
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टिकटॉक पर बहुत सारे कोंट्स (Contes) भी होते हैं। क्रिएटर्स को वीडियो बनाने के लिए थीम दिया जाता है। थीम पर वीडियो वायरल और सिलेक्ट होने के बाद क्रिएटर को 100 डॉलर से 1000 डॉलर का कूपन दिया जाता है।
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