पश्चिमी यूपी में गन्ने की खेती होती है वह इनवायरमेंट के लिए बहुत अच्छी नहीं है। बहुत सारा पानी इस्तेमाल होता है, गन्ने का प्रोडक्शन बहुत है, खपत उतनी नहीं है, बहुत सारा स्टोरेज है, फिर भी लोग गन्ने की खेती किए जा रहे हैं?
• किसी भी इलाके का ट्रापिकल (उष्णकटिबन्धीय) पैटर्न बहुत वर्षों में विकसित होता है। पश्चिमी यूपी में आजादी के पहले से ही गन्ने की खेती होती रही है। पर्यावरणीय समस्या है, उसके लिए गन्ने की जगह अन्य वैरायटी की फसलें उगाने का प्रचलन शुरू करना होगा। यूपी सरकार नयी योजनाएं लेकर आ रही है। दाल, आयल आदि मोटे अनाज की उपज के बारे में विचार किया जा सकता है। उससे पर्यावरणीय सामंजस्य बन जाएगा। वैसे भी गन्ने की उपज में ज्यादा समय लगता है, मोटे अनाज की उपज में इतना समय नहीं लगता। गन्ना मिलों से भुगतान की भी समस्या बनी रहती है। वह भुगतान समय से नहीं मिलने से किसान निवेश नहीं कर पाते हैं। यह भी एक मुददा है। कई तरह की वैरायटी की उपज को बढावा देने से यह समस्या भी हल हो सकती है।