जानिए कौन हैं बाबा लक्खा सिंह, जो किसानों और सरकार के बीच करवा सकते हैं सुलह

Published : Jan 08, 2021, 01:57 PM IST

नई दिल्ली. कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार को किसानों और सरकार के बीच 9वें दौर की बातचीत होनी है। इसी बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वो है बाबा लक्खा सिंह। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बाबा लक्खा सिंह ने मुलाकात की है। इस दौरान बाबा ने किसान और सरकार के बीच मध्यस्थता की पेशकश भी की। माना जा रहा है कि बाबा लक्खा सिंह 44 दिन से चल रहे गतिरोध को हल करवा सकते हैं, आईए जानते हैं कौन हैं बाबा लक्खा सिंह ?

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जानिए कौन हैं बाबा लक्खा सिंह, जो किसानों और सरकार के बीच करवा सकते हैं सुलह

कौन हैं बाबा लक्खा सिंह? 
पंजाब, हरियाणा समेत देश के कई राज्यों में नानकसर गुरुद्वारे हैं। इन गुरुद्वारों की प्रबंधक कमेटी के प्रमुख बाबा लक्खा सिंह ही हैं। बाबा की सिख समुदाय में काफी पहुंच है। वे सिखों में पूजनीय हैं। ऐसे में उनकी ओर से मध्यस्थता की पेशकश करना सरकार के लिए राहत की खबर हो सकती है। 

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बाबा लक्खा सिंह और कृषि मंत्री में क्या बातचीत हुई? 
बाबा लक्खा सिंह और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बीच दो घंटे बातचीत हुई। इस दौरान बाबा लक्खा सिंह ने किसानों के आंदोलन का मुद्दा उठाया। उन्होंने समझौता करवाने की पेशकश की। बाब ने कहा, केंद्र सरकार को कृषि कानून लागू करने की ताकत राज्य सरकारों के हाथ में देनी चाहिए। कृषि का मामला राज्य का है। 

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 वहीं, इस दौरान नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि सरकार किसानों की अधिकतर मांगे मान चुकी है। अन्य मांगे मानने को भी तैयार है। लेकिन कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। सरकार आगे आई है, तो किसानों को भी आगे आना चाहिए। 

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भावुक हुए नरेंद्र सिंह तोमर
बाबा लक्खा सिंह ने कृषि मंत्री से मुलाकात के बाद मीडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दो घंटे उनकी बात सुनी गई। लक्खा सिंह ने कहा, आंदोलन के चलते कई लोगों की जान चली गई। बच्चे, किसान, बजुर्ग महिला और पुरुष सब सड़कों पर हैं। इसलिए मैंने मध्यस्थता की पेशकश की। सरकार से बात अच्छी रही। हमने समाधान निकालने की कोशिश की।

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अब तक 8 दौर की हो चुकी बातचीत
सरकार और किसानों के बीच अब तक 8 दौर की बातचीत हुई है। हालांकि, अभी तक समाधान नहीं हो पाया है। वहीं, किसान पिछले 44 दिन से दिल्ली और आसपास के बॉर्डर पर जमे हुए हैं। सरकार और किसानों के बीच सिर्फ 7वें दौर की बैठक में दो मुद्दों पर सहमति बनी थी। इसके अलावा सभी बैठकें बेनतीजा रहीं। 

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