जब एक साथ उठी मां-बेटी की अर्थी, तो यह मंजर देख पूरा शहर रो पड़ा..अंतिम यात्रा ऐसी कि भर गईं गलियां

Published : Jan 18, 2021, 10:30 AM ISTUpdated : Jan 18, 2021, 10:36 AM IST

जालोर (राजस्थान). जालोर बस हादसे में 6 जिंदगिंया तो खत्म हो गईं, लेकिन इसका जख्म इतना गहरा है कि लोगों का पूरी जिंदगी भी नहीं भरेगा। किसी के पति की मौत हो गई तो किसी की पत्नी अपने सुहाग के सामने जिंदा जल गई। लेकिन सबसे दर्दभरी कहानी उस परिवार की है, जिसने एक साथ मां-बेटी को खो दिया। जब इन मां बेटी की एक साथ घर से अर्थी निकली तो यहां का मंजर ही बदल गया, हर आंख नम थी, हर कोई यही बोल रहा था कि हे भगवान ऐसा भयानक पल और किसी की जिंदगी में ना देखना पड़े।  

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जब एक साथ उठी मां-बेटी की अर्थी, तो यह मंजर देख पूरा शहर रो पड़ा..अंतिम यात्रा ऐसी कि भर गईं गलियां


दरअसल, बस में करंट लगने से 65 वर्षीय चांददेवी और उनकी 44 साल की बेटी सोनल जैन की मौत हो गई थी। रविवार के दिन अजमेर जिले के ब्यावर के सुराणा नगर में जब दोनों की शव यात्रा निकली तो हर आंख नम हो गई। इन मां बेटी का अंतिम संस्कार किया गया तो पूरा शहर रो पड़ा। बता दें कि सोनल की शादी उदयपुर में हुई थी, लेकिन वह अपने पति अनिल जैन के  साथ मायके में ब्यावर में रह रही थी। ऐसे में दोनों का अंतिम संस्कार यहीं पर किया गया।

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बता दें कि मृतक चांद देवी की बहन की बेटी की शादी का भोज का कार्यक्रम रविवार को अजमेर में रखा गया था। इसी उपलक्षय में कई मेहमान आ चुके थे। लेकिन दो दिन पहले ही यह बस हादसा हो गया और खुशी का माहौल गम में बदल गया। सब यही कह रहे थे कि देखो तो हम शादी के भोज में आए थे और अब रसोई का भोजन करना पड़ेगा।

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 आप देख सकते हैं बस हादसे में मारी गईं मां-बेटी चांददेवी और सोनल जैन की तस्वीर। वहीं जालोर बस हादसे में जान गंवाने वाले 6 श्रद्धालु अजमेर के रहने वाले थे। जिसमें तीन महिलाओं में दो मां बेटी थी। जबकि ड्राइवर, कंडक्टर समेत एक अन्य युवक भी इस हादसे में मारा गया।

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बस हादसे के चश्मदीद यात्री राजेन्द्र जैन ने एक दिन पहले मीडिया को बताया था बस में सभी यात्री जैन समाज के श्रद्धालु थे जो जालोर के मांडोली में जैन मंदिर के दर्शन करके लौट रहे थे। कोई नींद में था तो कई आपस में बात कर रहा था। अचानक एक झटका लगा और जोर से आवाज आई तो सभी लोग चीखने लगे। इसी दौरान जब मौंने खिड़की से झांककर देखा तो टायर के पास आग लगी हुई थी। कुछ ही पल में वह आग पूरे बस में लग गई। इसके बाद बस में अफरा-तफरी मच गई। लोग बचाओ-बचाओ चिल्ला रहे थे, कोई मर चुका था तो कई बेसुध था।

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हादसे के वक्त किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था, पूरी बस में आग और आसपास अंधेरा था, लोग इसअधेरे में बुरी तरह से चीख-पुकार रहे थे। में खिड़की की तरफ बैठा हुआ था, आग जब अंदर आई तो मैंने पास वाली कई खिड़कियों की कांच तोड़ दिए। जिससे लोग उसमें से कूदने लगे। मेरे साथ मेरी दो बहनें भी इस यात्र में थीं, पहले मैंने उनको बाहर निकला, इसके बाद मैंने भी छलांग लगा दी।  तब तक बस में आग काफी फैल चुकी थी। कुछ ही सेकंड्स में भयानक लपटें उठने लगीं, जो लोग अंदर रह गए वह जिंदा जलकर मर गए। (हादसे में पीड़ित परिवार)
 

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एक और चश्मदीदी 21 साल के दर्शन ने बताया था कि दरअसल, बस का ड्राइवर रास्ता भटक गया और एक गांव की तरफ ले गया, जहां संकरे रास्ते में गाड़ी एक टैक्टर से टकरा गई। पीछे लौटाते समय बस 11 केवी की लाइन की चपेट में आ गई और यह हादसा हो गया। देखते ही देखते करंट पूरी बस में फैल गया और भयानक आग लग गई।

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