STI से पूरी तरह नहीं बचा सकता कंडोम, ये 6 चीजें कर सकती हैं मदद

Published : Sep 10, 2024, 11:06 AM ISTUpdated : Sep 10, 2024, 11:33 AM IST
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सार

कंडोम के इस्तेमाल से बहुत तरह के यौन संचारित संक्रमण (STI) का खतरा घट जाता है, लेकिन यह सभी तरह के संक्रमण से 100% बचाव नहीं करता। कंडोम के इस्तेमाल के बाद भी STI होने के कई कारण हो सकते हैं।

हेल्थ डेस्क। STI (Sexually Transmitted Infections) ऐसे संक्रमण हैं जो यौन संबंध बनाने के चलते एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलते हैं। STI से बचने के लिए सबसे अधिक कंडोम (Condoms) का इस्तेमाल होता है। ये यौन संबंध बनाए जाने के दौरान फिजिकल बैरियर का काम करते हैं और एक इंसान के शरीर के तरल पदार्थ को दूसरे के त्वचा के साथ सीधे संपर्क में आने से रोकते हैं। इसके संपर्क में आने से संक्रमण फैलने का डर रहता है।

कंडोम के इस्तेमाल से बहुत तरह के STI का खतरा घट जाता है। हालांकि, एक सच्चाई यह भी है कि यह सभी तरह के संक्रमण से 100% बचाव नहीं करता। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार डॉ. साधना सिंघल विश्नोई ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है।

इन वजहों के चलते कंडोम से नहीं मिलती STI से 100% सुरक्षा

1. अधूरी सुरक्षा

कंडोम केवल लिंग को ढकता है। इससे जननांग क्षेत्र के अन्य हिस्से खुले रहते हैं। कई एसटीआई (जैसे- हर्पीज, ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी), और सिफलिस) कंडोम द्वारा कवर नहीं किए गए क्षेत्रों में त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैल सकते हैं। इसलिए लगातार कंडोम के इस्तेमाल के बाद भी इन बीमारियों के लगने का डर रहता है।

2. कंडोम का फटना या फिसलना

कंडोम कभी-कभी सेक्स के दौरान फट या फिसल सकता है। इससे उसका असर घट जाता है। कंडोम का सही तरीके से इस्तेमाल करना आना भी जरूरी है। टिप पर पर्याप्त जगह न छोड़ने या लेटेक्स कंडोम के साथ तेल वाले ल्यूब्रिकेंट इस्तेमाल करने पर कंडोम फटने की संभावना अधिक होती है।

3. फंगल इंफेक्शन

कंडोम के इस्तेमाल से फंगल इंफेक्शन लगने का डर कम होता है, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षा नहीं देता। शरीर के उन हिस्सों में भी फंगस होते हैं जहां कंडोम से सुरक्षा नहीं मिलती। इसके चलते कंडोम के इस्तेमाल के बाद भी फंगल इंफेक्शन हो सकता है।

STI से बचने के लिए अपनाएं ये 6 उपाय

1. नियमित STI टेस्ट

यौन रूप से सक्रिय लोगों को बार-बार अपना टेस्ट करना चाहिए। खासकर उन लोगों को जिनके कई यौन साथी हैं। नियमित टेस्ट से STI का जल्दी पता लगाने और इलाज कराने में मदद मिलती है। कई STI के लक्षण नहीं होते। बिना टेस्ट के इसका पता नहीं चलता।

2. अच्छी स्वच्छता रखना

संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए खुद को अच्छी तरह साफ रखना जरूरी है। सेक्स से पहले और बाद में जननांग क्षेत्र को धोना चाहिए। तौलिया या अंडरवियर शेयर नहीं करना चाहिए।

3. यौन साथी की संख्या सीमित करना

यौन साथी की संख्या सीमित कर आप STI से बच सकते हैं। आपके जितने ज्यादा साथी होंगे, संक्रमण से पीड़ित व्यक्ति से मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।

4. टीकाकरण

HPV और हेपेटाइटिस बी जैसे कुछ यौन संचारित रोगों के लिए टीके उपलब्ध हैं। टीका लगवाने से इन संक्रमणों से सुरक्षा मिल सकती है।

5. यौन साथी के साथ बातचीत और टेस्ट

STI से बचने के लिए अपने यौन साथी के साथ इस संबंध में बातचीत जरूरी है। दोनों को अपने-अपने टेस्ट कराने चाहिए। इससे जोखिम कम हो जाएगा।

6. डॉक्टर से लें सलाह

यदि एसटीआई के कोई लक्षण दिखाई देते हैं या अपने यौन स्वास्थ्य के बारे में चिंता है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। उचित सलाह और टेस्ट से समय पर इलाज हो सकेगा। इससे परेशानी कम होगी।

नोट - तस्वीर प्रतीकात्मक है।

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