36 की उम्र में प्रेग्नेंसी खुशखबरी या हेल्थ रिस्क? सच्चाई जानकर चौंक जाएंगे

Published : Aug 25, 2025, 10:43 PM IST
Pregnancy at 36 Safe or Risky Expert Advice and The Truth

सार

36 की उम्र में मां बनना न तो असंभव है और न ही सिर्फ रिस्की। सही तैयारी और डॉक्टर की गाइडेंस से यह सफर सेफ और खूबसूरत बन सकता है। परिणीति चोपड़ा जैसी कई महिलाएं साबित करती हैं कि मदरहुड उम्र का नहीं, आत्मविश्वास और देखभाल का खेल है।

परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपनी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी शेयर की है जिसके बाद एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है कि क्या 35 या 36 की उम्र में मां बनना सेफ है? मेडिकल एक्सपर्ट्स इसे “एडवांस्ड मैटरनल एज” कहते हैं, यानी प्रेग्नेंसी का वह पड़ाव जहां कुछ रिस्क फैक्टर्स बढ़ जाते हैं। अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लेट प्रेग्नेंसी सेफ है? या फिर ये बच्चा-जच्चा दोनों की जान को मुश्किल में डालने वाली कंडीशन है? यहां जानें इसके बारे में मेडिकल एक्सपर्ट क्या कहते हैं।

36 की उम्र में प्रेग्नेंसी के रिस्क फैक्टर्स?

गायनेकोलॉजिस्ट्स की मानें तो 35 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी को “एडवांस्ड मैटरनल एज” माना जाता है और इस दौरान कुछ चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इस उम्र तक आते-आते महिलाओं के अंडों की क्वालिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिसके कारण मिसकैरिज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा लेट प्रेग्नेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर और गेस्टेशनल डायबिटीज जैसी कंडीशन भी देखने को मिलती हैं, जो मां और बच्चे दोनों के लिए कॉमप्लीकेशन पैदा कर सकती हैं।

डॉक्टर्स यह भी मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ क्रोमोसोमल एबनॉर्मैलिटीज, जैसे डाउन सिंड्रोम का रिस्क भी थोड़ा बढ़ जाता है। वहीं, कई मामलों में डिलीवरी के समय नॉर्मल बर्थ की बजाय सी-सेक्शन का ऑप्शन अपनाना पड़ता है, क्योंकि शरीर की क्षमता और मेडिकल कंडीशन पर इसका असर दिखाई देता है।

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क्या कहते हैं मेडिकल एक्सपर्ट्स?

डॉक्टर्स मानते हैं कि लेट प्रेग्नेंसी में रिस्क तो होते हैं, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है। आज के समय में रेगुलर हेल्थ चेकअप्स, एडवांस्ड स्क्रीनिंग टेस्ट और डॉक्टर की सही मॉनिटरिंग से कॉमप्लीकेशन को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। वहीं, मानसिक मिच्योरिटी और फाइलेंशियल स्टेबिलिटी लेट प्रेग्नेंसी को कई मायनों में आसान भी बना देती है।

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36 में कैसे प्लान करें सेफ प्रेग्नेंसी?

36 की उम्र में प्रेग्नेंसी सुरक्षित रखने के लिए प्री-कॉन्सेप्शन चेकअप बेहद जरूरी है ताकि हेल्थ इश्यू समय रहते पता चल जाएं। बैलेंस डाइट लें, जिसमें फोलिक एसिड, कैल्शियम और प्रोटीन हों, इसके साथ एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए। जैसे रेगुलर एक्सरसाइज, ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल की मॉनिटरिंग, साथ ही एनटी स्कैन और डबल मार्कर टेस्ट मददगार साबित होते हैं। सबसे जरूरी बात ॉतनाव से दूर रहना और पॉजिटिव मानसिकता बनाए रखना है।

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