रुबिस्को जो प्रोटीन की दुनिया में ला सकता है बड़ा बदलाव! जानें इंसानों पर कैसे करेगा काम

Published : Jun 17, 2026, 10:01 AM IST
Rubisco Most abundant protein

सार

Rubisco Protein: रुबिस्को का पूरा नाम क्या है और यह कहां पाया जाता है? रुबिस्को को उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन क्यों माना जाता है? रुबिस्को के बड़े पैमाने पर उत्पादन में कौन-कौन सी चुनौतियां हैं? 

आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल के दौर में लोग अपने प्रोटीन इंटेक पर खास ध्यान दे रहे हैं। अंडे, दूध, पनीर, दालें और चिकन जैसे सोर्स के बारे में करीब हर कोई जानता है, लेकिन एक ऐसा प्रोटीन भी हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। लेकिन वैज्ञानिक इसे पृथ्वी का सबसे प्रचुर (Abundant) प्रोटीन मानते हैं। इसका नाम है रुबिस्को (RuBisCO)। आने वाले वर्षों में यह प्रोटीन न्यूट्रिशन की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है।

क्या है रुबिस्को?

रुबिस्को का पूरा नाम Ribulose-1,5-bisphosphate carboxylase-oxygenase है। यह एक एंजाइम है जो हर हरी पत्ती में पाया जाता है। पौधों के जीवन और विकास में इसकी अहम भूमिका होती है। इसी लंबे नाम के शुरुआती अक्षरों से इसका संक्षिप्त नाम RuBisCO बना है।

पौधों में क्या काम करता है रुबिस्को?

रुबिस्को पृथ्वी पर मौजूद सबसे अधिक मात्रा वाला एंजाइम माना जाता है। यह प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड को ग्लूकोज जैसे ऊर्जा-समृद्ध पदार्थों में बदलने में मदद करता है। सरल शब्दों में कहें तो यह पौधों को भोजन बनाने में सहायता करता है और उनके विकास के लिए आवश्यक शर्करा का निर्माण करता है।

क्या यह इंसानों के लिए भी फायदेमंद है?

विशेषज्ञों के अनुसार रुबिस्को भविष्य का एक बेहतरीन प्लांट-बेस्ड प्रोटीन बन सकता है। इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी 9 आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसे उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन माना जाता है।

फिटनेस और मसल्स के लिए क्यों खास है?

रुबिस्को आसानी से पच जाता है और पेट में तेजी से टूटकर अमीनो एसिड उपलब्ध कराता है। इससे मांसपेशियों की रिकवरी और मरम्मत में मदद मिल सकती है। इसके अलावा पाचन के दौरान कुछ लाभकारी पेप्टाइड्स भी निकलते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अतिरिक्त फायदे दे सकते हैं।

एलर्जी की समस्या भी नहीं

रुबिस्को की एक और खासियत यह है कि यह आमतौर पर एलर्जी पैदा नहीं करता। इसमें डेयरी, सोया या ग्लूटेन जैसे सामान्य एलर्जेन नहीं होते। साथ ही इसका स्वाद हल्का और टेक्सचर बहुउपयोगी होता है, जिससे इसे कई तरह के खाद्य उत्पादों में शामिल किया जा सकता है। एलर्जिक नहीं होने की वजह से इसका सेवन हर कोई कर सकता है।

फिर अभी तक क्यों नहीं हुआ फेमस

हालांकि रुबिस्को पत्तियों का मुख्य प्रोटीन है, लेकिन यह कुल पत्ती का केवल लगभग 3 प्रतिशत हिस्सा ही होता है। इसे निकालने की प्रक्रिया काफी टफ और महंगी है। इसके लिए पौधों की कोशिका भित्ति और क्लोरोप्लास्ट झिल्ली को तोड़ना पड़ता है। साथ ही पत्तियां कटने के कुछ घंटों के भीतर ही प्रोसेसिंग करनी होती है, जिससे प्रोडक्शन और भी कठिन हो जाता है।

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भविष्य में बढ़ सकती है मांग

न्यूजीलैंड की Leaft Foods, नीदरलैंड्स की Rubisco Foods और अमेरिका की Plantible Foods जैसी कंपनियां रुबिस्को के प्रोडक्शन पर काम कर रही है। हालांकि अभी यह आम लोगों तक आसानी से नहीं पहुंच पाया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह प्रोटीन उद्योग का बड़ा हिस्सा बन सकता है।

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