
हेल्थ डेस्क. हर्निया को लेकर लोगों में बहुत कम जानकारी होती है। कई बार लोग इसके लक्षणों को समझने में देरी कर देते हैं। जिसकी वजह से यह ज्यादा बढ़ जाता है। भारतीयों में यह बीमारी सबसे ज्यादा होती है। इसके पीछे कई वजह काम करती है। लेकिन ये जानने से पहले आइए जानते हैं हर्निया क्या है (What Is Hernia) और इसके लक्षण क्या हैं।
क्या है हर्निया
हर्निया एक बीमारी की स्थिति है जिसमें विशेष अंग (आमतौर पर फैट या आंत) शरीर में अपने पूर्व-निर्धारित स्थान से दूसरे स्थान पर चला जाता है। यह आमतौर पर पेट या ग्रोइन क्षेत्र में असामान्य सूजन के रूप में दिखता है। जो खींचने वाले दर्द से जुड़ा हो सकता है। सूजन आमतौर पर खांसने या जोर लगाने पर बढ़ जाती है और लेटने पर गायब हो जाती है। यह विशेषता हर्निया को अन्य स्थायी सूजन से अलग करती है।
हर्निया के लक्षण क्या होते हैं
हर्निया की बीमारी में पेट के साइड या नीचे सूजन हो सकती है
अगर आप खांस रहे हैं और इस दौरान सूजन दिखे तो भी हर्निया को पहचाना जा सकता है
अगर सूजन लेटने पर अंदर हो जाती है तो यह भी हर्निया का एक संकेत है
हर्निया जन्मजात हो सकता है
हर्निया जन्मजात या जन्म के बाद हो सकता है। जन्मजात हर्निया भ्रूण के इलाकों की दृढ़ता के कारण होता है जो ओमेंटम (पेट की चर्बी) या आंत को अंडकोश की ओर ले जाने की अनुमति दे सकता है। वे आमतौर पर पुरुषों में देखे जाते हैं और ग्रोइन या स्क्रोटम में सूजन के रूप में मौजूद होते हैं। वहीं बाद में जो लोग हर्निया के शिकार होते हैं उसके पीछे वजह मांसपेशियों की कमजोरी, पेट के दबाव में बढ़ोतरी या कोई सर्जरी का परिणाम हो सकता है।
इन वजहों से होता है हर्निया
एक सेंट्रल स्टडी में दिल्ली, नोएडा, गुड़गांव और गाजियाबाद में पेट और कमर में सूजन की शिकायत वाले 5000 लोगों की जांच की गई। इनमें से लगभग 15% हर्निया से पीड़ित पाए गए जिन्हें सर्जिकल ट्रीटमेंट की जरूरत थी। स्टडी करने वाले नई दिल्ली स्थित सीनियर लैप्रोस्कोपिक और बेरियाट्रिक सर्जन डॉ अनिरुद्ध विज कहते हैं, 'इस अध्ययन के अधिकांश प्रतिभागियों में कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक हर्निया से संबंधित लक्षण थे। जबकि कुछ की पिछली सर्जरी हुई थी जिससे मांसपेशियों में कमजोरी हो गई थी। वहीं कुछ लोगों को इंट्रा एब्डॉमिनल प्रेशर की वजह से हर्निया हुआ था।'
मोटापा की वजह से भी हो सकता है हर्निया
भारत की आबादी कई कारणों से हर्निया से ग्रस्त है। डॉ. अनिरुद्ध विज कहते हैं, 'कोकेशियान लोगों की तुलना में भारतीयों में आनुवंशिक रूप से कम मांसपेशियां होती हैं, जो उन्हें मांसपेशियों की कमजोरी का शिकार बनाती हैं।' आमतौर पर भारतीय शिशुओं में जन्म के समय कम वजन जन्मजात हर्निया के लिए एक जोखिम कारक है। मांसपेशियों का कम प्रतिशत और उच्च आंत का वसा (पेट में जमा वसा) विशेष रूप से पेट के हर्निया का शिकार होता है। साथ ही, मोटापे की बढ़ती घटनाओं और शारीरिक गतिविधि की कमी से बाद के जीवन में हर्निया विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।
सिगरेट का धूम्रपान, जो भारतीयों में आम है, कोलेजन मेटाबॉलिज्म को बदलकर मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनता है। यह पुरानी खांसी और पेट की मांसपेशियों पर बार-बार खिंचाव का कारण बनता है जो हर्निया होने की आशंका को बढ़ा देती है।
खराब लाइफस्टाइल से बचें
डॉ. अनिरुद्ध विज ने अपने अध्ययन में कहा, 'वेस्टर्न डाइट, जंक फूड और खराब लाइफस्टाइल पुरानी कब्ज और मल में खिंचाव को जन्म देती है जो फिर से पेट के अंदर के दबाव को बढ़ा देती है।' हर्निया की रोकथाम नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखने, धूम्रपान से बचने और पुरानी खांसी और कब्ज के ट्रीटमेंट से हो सकती है।
हर्निया का ट्रीटमेंट
हर्निया का इलाज ऑपरेशन के जरिए किया जाता है। ऑपरेशन के जरिए मांसपेशियों के अंतर को ठीक किया जाता है। इसके साथ ही ऊतकों को स्ट्रॉग किया जाता है। लैप्रोस्कोपिक के जरिए ऑपरेशन किया जाता है।
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