
Pure Banarasi Saree identify Tips: बनारसी साड़ी लगभग हर महिला की वार्डरोब का अहम हिस्सा होती है। प्योर बनारसी सिल्क साड़ी को विरासत माना जाता है, जो पीढ़ियों तक ट्रांसफर होती है क्योंकि इसकी चमक सालों तक बनी रहती है। लेकिन कई बार लोग महंगी साड़ी खरीदते समय असली की जगह सेमी बनारसी सिल्क ले आते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप प्योर बनारसी साड़ी पहचानना जानें।
असली और नकली बनारसी साड़ी का फर्क इसकी बॉर्डर या एजेज से आसानी से समझा जा सकता है। नकली साड़ी की एजेज़ पर इंटर-लॉकिंग होती है और वे काफी हार्ड दिखाई देती हैं। जबकि प्योर बनारसी साड़ी की एजेज पर इंटर-लॉकिंग नहीं होती, ये बिल्कुल नेचुरल, प्लेन और स्मूद होती हैं।
जब साड़ी को उलटकर इसके बैक साइड को देखते हैं, तो नकली बनारसी में डिजाइन के पीछे ढेरों लूज थ्रेड्स होते हैं जिनकी कटिंग प्रॉपर नहीं होती। इस्तेमाल की गई जरी देखने में असली जैसी लगती है, लेकिन असल में वह प्लास्टिक होती है, जो छूने पर हल्की रफनेस देती है।
वहीं, प्योर बनारसी साड़ी में डिजाइन इंटरलॉकिंग तकनीक से बुना जाता है, इसलिए बैक साइड पर कोई भी लूज़ थ्रेड या कच्चापन नहीं दिखता। जरी भी पूरी तरह असली और प्रीमियम होती है।
सेमी बनारसी साड़ी में हल्की सिंथेटिक फील होती है और यह थोड़ा भारी वजन वाली होती है। इसके विपरीत, प्योर बनारसी साड़ी का फैब्रिक हल्का रफ-सिल्की टच वाला होता है और यह काफी लाइटवेट होती है, जिससे इसे आसानी से पहना और कैरी किया जा सकता है।
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नकली बनारसी साड़ी के धागे को जलाने पर प्लास्टिक जैसी तेज गंध आती है, और यह तुरंत पिघलने लगता है। लेकिन असली बनारसी साड़ी के थ्रेड को जलाने पर बाल जलने जैसी महक आती है। यह तुरंत आग नहीं पकड़ता, केवल बहुत करीब आग ले जाने पर ही हल्का जलता है और अपनी राख छोड़ता है। इसलिए बनारसी साड़ी खरीद रही है, स्पेशली अगर महंगी हो, तो फिर इन बातों पर गौर जरूर करें। असली बनारसी साड़ी की रेंज 10 हजार से शुरू होकर लाखों तक जाती है।
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