फगुवा होली से लेकर फूलों की होली तक, भारत में दिखते हैं Holi के अलग-अलग रंग

Published : Mar 20, 2024, 10:15 AM IST
holi

सार

होली भारत के सबसे अहम त्योहारों में से एक है। इसे काफी उत्साह और प्रेम के साथ मनाया जाता है। सभी रिजिनल बंदिशों को तोड़ते हुए इस दिन को सेलिब्रेट किया जाता है।

लाइफस्टाइल डेस्क. होली आते ही फिजा में एक अलग ही खुमारी छा जाती है। मन के अंदर लाल-पीले, नीले रंगों की तरंग उठने लगती है। पूरे भारत में इस त्योहार को मनाया जाता है। लेकिन मनाने का तरीका थोड़ा अलग होता है। होलिका दहन से रंगों का यह त्योहार शुरू होता है। रंग, डांस, लोकगीत और तरह-तरह के व्यंजन इस फेस्टिवल को खूबसूरत बनाते हैं। आइए यहां हम आपको बताते हैं कि सबसे फेमस होली कहां मनाया जाता है।

फूलों की होली

वृंदावन में फूलों की होली खेली जाती है। भारत ही नहीं दुनिया भर के लोग इससे आकर्षित होते हैं और इसे देखने आते हैं। शांति और प्रेम के साथ लोग एक दूसरे पर फूल बरसाते हैं। राधा रानी और कृष्ण को फूलों से सराबोर कराया जाता है।

बरसना की लठमार होली

बरसान में लठमार होली खेली जाती है। यहां पर महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हुई नजर आती हैं और वो उनसे अपना बचाव करतें हैं। ये प्रथा इतनी अदभुत है कि देश विदेश के लोग इसे देखने के लिए वृंदावन आते हैं।

रंग पंचमी

पश्चिमी भारत विशेषकर महाराष्ट्र में होली को रंग पंचमी या शिमगा के नाम से जाना जाता है। होलिका दहन, एक लोकप्रिय परंपरा है जिसमें उत्सव से एक रात पहले लकड़ी की चिता जलाना शामिल है, जो उत्सव का हिस्सा है। अगली सुबह रंग पंचमी के दिन लोग गीले और सूखे रंगों और पानी से होली मनाते हैं, जो एक सप्ताह तक चलती है।

खड़ी होली

उत्तराखंड में होली के कई अलग-अलग नाम हैं जिनमें बैठकी होली, महिला होली और खड़ी होली शामिल हैं। लोग पारंपरिक पोशाक पहनते हैं, "टोली" में घूमते हुए लोक गीत गाते हैं और एक-दूसरे के चेहरे पर रंग लगाकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं।

फगुवा होली

बिहार में होली को स्थानीय भोजपुरी बोली में फगुवा के नाम से जाना जाता है। फगुवा की शुरुआत होलिका दहन से होती है, इसके बाद गीले और सूखे रंगों से होली मनाई जाती है और लोग पूरे दिन पारंपरिक संगीत और लोक गीत गाते हैं।

डोल जात्रा

पश्चिम बंगाल में होली को बसंत उत्सव या डोल जात्रा के नाम से जाना जाता है। इस दिन महिलाएं ज्यादातर पीला रंग पहनती हैं, जो बसंत से जुड़ा रंग है। रंगों के अलावा, यहां लोग रबींद्रनाथ टैगोर की कविता पढ़ते हैं। उसके बाद पारंपरिक गीत और नृत्य प्रदर्शन करते हैं। होली के बाद, डोल जात्रा गायन और नृत्य के साथ बंगाल की सड़कों पर भगवान कृष्ण की एक भव्य शोभा यात्रा है।

मंजल कुली

केरल में इस दिन लोग रंगों से खेलते हैं। होली खेलने के लिए जिस रंग का प्रयोग किया जाता है वह हल्दी या मंजल कुली होता है। केरल के कुडुम्बी और कोंकणी समुदाय इस पारंपरिक तरीके से होली मनाते हैं।

धुलंडी होली

धुलंडी होली भाभी (भाभी) और देवर (देवर) के बीच खट्टे-मीठे रिश्ते का जश्न मनाती है। इस खास दिन पर भाभियों को अपने देवरों को रंगने और रंगने का मौका मिलता है।

और पढ़ें:

10 ऐसी ड्रेस जब देवरानी-जेठानी ने फ्लॉन्ट किया फिगर, ननद भी नहीं पीछे

गर्मी में भी रहेंगी खिली खिली, पहनकर तो देखें विद्या बालन सी 10 साड़ी

PREV

Lifestyle articles & tips in Hindi (लाइफ स्टाइल न्यूज़): Read latest lifestyle articles, Relationship tips, Health & beauty tips, Travel news in Hindi online at Asianet News Hindi.

Recommended Stories

कम्फर्ट और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बिनेशन, ऑफिस के लिए चुनें 5 फ्लैट फुटवियर
4 नेचुरल होम फ्रेशनर बारिश में महकाएंगे घर, नहीं आएगी सीलन की बदबू