
रिलेशनशिप डेस्क. देश के पूर्व पीएम मनमोहन सिंह गुरुवार रात 92 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन से पूरे देश में शोक का माहौल है। 7 दिन का राष्ट्रिय अवकाश घोषित किया गया है। 2 बार देश की बागडोर संभाल चुके डॉ मनमोहन सिंह अपने पीछे अपनी पत्नी और 3 बेटियों को छोड़कर गए हैं। सरल और शांत स्वभाव के डॉ सिंह के मन में तब हलचल मची थी जब उन्होंने गुरुशरण सिंह को देखा था। यहां हम बात दिवंगत पूर्व पीएम के लव और मैरेज लाइफ की करेंगे।
डॉक्टर मनमोहन सिंह की पत्नी गुरुशरण सिंह इतिहास की प्रोफेसर, लेखिका और कीर्तन गायिका हैं। वो एक गुशल गृहणी भी हैं। डॉक्टर सिंह के जीवन में उनका स्थान एक मजबूत सहायक और प्रेरणास्रोत का भी है। 1957 में मनमोहन सिंह जब कैंब्रिज से पढ़कर देश वापसी की तो उनकी फैमिली को शादी की चिंता हुई। उन्होंने उनके लिए लड़की की तलाश शुरू की। सिंपल और सरल जिंदगी जीने वाले मनमोहन सिंह को अरेंज मैरेज से कोई गुरेज नहीं था। लेकिन एक चीज थी वो कि लड़की पढ़ी लिखी होनी चाहिए।
कहा जाता है कि उनकी फैमिली ने एक काफी संपन्न फैमिली की लड़की को पसंद किया। जहां बहुत सारा दहेज भी मिल रहा था। लेकिन लड़की पढ़ी लिखी नहीं थी। जब मनमोहन सिंह के सामने फैमिली ने उस लड़की के बारे में बताया और कहा कि खूब दहेज भी मिल रहा तो उन्होंने तुरंत शादी से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि 'दहेज नहीं पढ़ी-लिखी लड़की चाहिए।'
कहते हैं कि इसी दौरान बसंत को मनमोहन सिंह के बारे में पता चला और उन्होंने अपनी छोटी बहन कीर्तन गायिका गुरुशरण सिंह का रिश्ता लेकर उनके घर पहुंच गई। बातचीत चली और दोनों के मुलाकात का वक्त तय किया गया। गुरुशरण सिंह व्हाइट सलवार कमीज में सिंह से मिलने पहुंची। छत पर दोनों की बातचीत हुई। पूर्व पीएम ने इस मुलाकात के बाद शादी के लिए हां कह दिया।
बताया जाता है कि एक संगीत इवेंट में गुरुशरण सिंह ने कीर्तन गाया था। इस दौरान पूर्व पीएम ने उन्हें देखा था। पढ़ी लिखी लड़की चाहने वाले मनमोहन सिंह को यह भी पता चल गया था कि गुरुशरण इतिहास में एमए कर रही थी। लेकिन इस इवेंट में एक और बात हुई। गुरुशरण सिंह के गुरु ने कहा कि उन्होंने अच्छा गीत नहीं गया है। जिस पर मनमोहन सिंह ने कहा था कि 'नहीं गुरु जी, ऐसा नहीं है, उन्होंने अच्छा गाया ।'
कहा जाता है कि इसके बाद पूर्व पीएम ने गुरुशरण सिंह को अपने घर ब्रेकफास्ट के लिये बुलाया। जहां उन्होंने अंग्रेजी नाश्ते यानी कि अंडे और टोस्ट से इंप्रेस करने की कोशिश की थी। इस बात का खुलासा खुद गुरुशरण सिंह ने एक इंटरव्यू में किया था। दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे। फैमिली को भी इस रिश्ते से कोई दिक्कत नहीं थी। साल 1958 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए। ताउम्र दोनों साथ रहें। तीन बेटियों के माता-पिता बनें।
डॉ. मनमोहन सिंह और गुरुशरण की प्रेम कहानी इस बात का एग्जापल है कि एक मजबूत रिश्ता आपसी सम्मान, विश्वास और सहयोग पर बेस्ड होता है। दोनों ने अपने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का साथ निभाया। उनका रिश्ता आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा है कि सादगी और समर्पण के साथ एक मजबूत और खुशहाल जीवन जीया जा सकता है।
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