मंदिर आंदोलन में इस मां ने 25 साल तक जीया दो बेटों का बलिदान, बहन ने सुनाई दास्तान

Published : Nov 10, 2019, 01:44 PM ISTUpdated : Nov 10, 2019, 01:51 PM IST
मंदिर आंदोलन में इस मां ने 25 साल तक जीया दो बेटों का बलिदान, बहन ने सुनाई दास्तान

सार

कोलकाता निवासी राम कोठारी और शरद कोठारी ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में तत्कालीन बाबरी मस्जिद के ढांचे पर कथित तौर पर भगवा झंडा फहराया था और दो नवंबर 1990 को अयोध्या में पुलिस की गोली से उनकी मौत हुई।

नई दिल्ली. राम कोठारी आज जिंदा होते तो बीकानेर में अपना कारोबार कर रहे होते या फिर कोलकाता में पिता का व्यवसाय संभाल रहे होते। लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था। राम मंदिर के लिए 1990 में हुई कारसेवा में शामिल होने को राम कोलकाता से अपने छोटे भाई शरद के साथ अयोध्या पहुंचे थे, जहां दोनों भाई चार दिन बाद हुई गोलीबारी का शिकार हो गए।

कोठारी बंधुओं की इकलौती बहन पूर्णिमा कोठारी अयोध्या पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से काफी खुश हैं। मगर वह अपना दुख छिपाना भी नहीं चाहतीं। कोलकाता से ‘भाषा’ से फोन पर बातचीत में पूर्णिमा ने कहा “मैं आज भी अपने भाइयों के उस बलिदान को जी रही हूं।"

कोलकाता निवासी राम कोठारी और शरद कोठारी ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में तत्कालीन बाबरी मस्जिद के ढांचे पर कथित तौर पर भगवा झंडा फहराया था और दो नवंबर 1990 को अयोध्या में पुलिस की गोली से उनकी मौत हुई।

इसे भी पढ़ें- मंदिर आंदोलन में चली गई थी इन दो भाइयों की जान, दिन भर सोशल मीडिया पर ट्रेंड होती रही ये स्टोरी

उनके अयोध्या पहुंचने से ठीक पहले वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा को बिहार के समस्तीपुर में रोककर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। अयोध्या में कारसेवकों के लिए भी हालत मुश्किल होने लगे थे। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।

कार सेवक थे दोनों भाई

कोठारी बंधु 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुंचे और उसी शाम सैकड़ों कारसेवकों के साथ बाबरी मस्जिद पर भगवा झंड़ा फहराने चल पड़े। बाबरी मस्जिद पर भगवा झंड़ा फहराने की जो तस्वीरें मीडिया में आईं, उनमें राम कोठारी गुंबद के सबसे ऊपर हाथ में भगवा झंडा थामे खड़े थे और शरद कोठारी उनके बगल में खड़े थे।

मीडिया के अनुसार, इसके बाद दो नवंबर 1990 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन कारसेवक एक बार फिर बाबरी मस्जिद की ओर कूच करने के लिए हनुमान गढ़ी मंदिर के पास जमा हुए। इस बार पुलिस ने उन्हें काबू में करने के लिए गोली चलाई। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक हनुमान गढ़ी के पास हुई इस गोलीबारी में 16 लोग मारे गए, जिसमें राम और शरद कोठारी भी शामिल थे।

पूर्णिमा ने बताया, "मैं मानती हूं कि जब किसी परिवार से कोई बलिदान होता है, तो उस बलिदान को पूरा परिवार जीता है। मैंने अपनी आंखों से यही देखा है कि मेरे माता-पिता ने अपने बच्चों के बलिदान को अपनी सारी उम्र जिया। मेरी मां जब गुजरी, तो मेरे भाइयों को गुजरे 25 साल हो गए थे, लेकिन वह लगातार उस बलिदान को जी रही थीं।"

इसे भी पढ़ें- अयोध्या के लिए 9 नवंबर है बेहद खास, 30 साल पहले इसी दिन हुई थी राम मंदिर बनाने की शुरुआत

उनके पिता का 2002 में और मां का 2016 में देहांत हुआ

कोठारी बंधुओं का परिवार मूल रूप से बीकानेर का रहने वाला था और दोनों भाइयों को बीकानेर से बहुत लगाव था। इस बारे में पूर्णिमा ने बताया, "पिता जी ने बीकानेर में सॉफ्ट ड्रिंक की छोटी फैक्टरी खोली थी। दोनों भाई आपस में बहस करते थे कि तुम कलकत्ता रहना, मैं बीकानेर जाऊंगा। दोनों को बीकानेर बहुत पसंद था। दोनों बीकानेर में जाकर रहना चाहते थे।"

व्यावसायी समाज से संबंध रखने के कारण दोनों भाइयों को नौकरी करने की बहुत चाह नहीं थी और राम कोठारी ने तो कोलकाता में पिता के लोहे के कारोबार में हाथ बंटाना भी शुरू कर दिया था। पूर्णिमा ने बताया, "ये तय था कि वह बिजनेस ही करेंगे।" उन्होंने बताया कि दोनों भाई बहुत छोटी उम्र से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े गए थे और जिस समय अयोध्या में उनकी मौत हुई उस समय राम 22 साल के और शरद 20 साल के थे। पूर्णिमा शरद से एक साल छोटी हैं।

बहन ने भाइयों को बताया राम-लक्ष्मण

उस समय कारसेवा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधिकारियों ने यह नियम बनाया था कि एक परिवार से एक व्यक्ति ही कारसेवा में जाएगा। अगर कोठारी भाइयों ने ये बात मानी होती, तो उनमें से एक आज जीवित होता, लेकिन उनकी जिद के आगे परिवार को झुकना पड़ा। पूर्णिमा बताती हैं, "राम ने कहा कि राम के काम में राम तो जाएगा। छोटे ने कहा कि राम जहां जाएगा, वहां लक्ष्मण भी जाएगा। ऐसा करके इन्होंने अधिकारियों और घर वालों दोनों को निरुत्तर कर दिया।"

उन दोनों की मौत के बाद उनकी अंतिम इच्छा यानी राम मंदिर आंदोलन में उनके माता-पिता भी शामिल हो गए। पूर्णिमा ने बताया, "मेरे मां-पिता जी हर कारसेवा में अयोध्या पहुंचते थे। छह दिसंबर को जिस दिन ढांचा गिराया गया था, उस दिन भी वहां मेरे मां-पिता कारसेवा के लिए मौजूद थे।" 

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

बाइक पर पत्नी ने 27 सेकेंड में पति को जड़े 14 थप्पड़, देखें Viral Video
Viral Road Rage Video: HR नंबर प्लेट Thar के कारनामें ने इंटरनेट पर मचाई खलबली