
नई दिल्ली, संसद के उच्च सदन में सोमवार को गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि असम के अलग अलग डिटेंशन सेंटर से अब तक 350 बंदियों को जमानत पर छोड़ दिया गया है। इन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर छोड़ा गया है। अप्रैल माह में एक याचिकाकर्ता की याचिका के जवाब ने सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आदेश दिया था।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के जवाब में 13 अप्रैल, 2020 के अपने आदेश में कहा था कि जो बंदी दो साल से इन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं उन्हें कानूनी शर्तों और 5 हजार रुपयों की सुनिश्चित राशि के हिसाब से ज़मानत दी जा सकती है। इसी फैसले के आधार पर पर केंद्र सरकार ने अब तक 350 बंदियों को असम के डिटेंशन सेंटर से मुक्त किया कर दिया है। इसके अलावा 15 बंदियों की बीते 2 सालों में अलग अलग बीमारियों से मृत्यु हो चुकी है।
क्या है डिटेंशन सेंटर?
किसी भी देश में अवैध अप्रवासियों (दूसरे देश से आए नागरिकों) को रखने के लिए जो जगह बनाई जाती है उसे डिटेंशन सेंटर कहते हैं। इसमें कोई व्यक्ति तभी तक रहता है जबतक कि वह अपनी नागरिकता साबित नहीं कर सके। यदि कोई व्यक्ति ट्रिब्यूनल/अदालत द्वारा विदेशी घोषित हो जाता है तो उसे अपने वतन वापसी तक इसी सेंटर में रखा जाता है।
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