कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए DGHS ने जारी की नई गाइडलाइन, जानिए सीटी स्कैन और रेमडेसिविर को लेकर क्या कहा

Published : Jun 10, 2021, 08:20 AM ISTUpdated : Jun 12, 2021, 12:17 PM IST
कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए DGHS ने जारी की नई गाइडलाइन, जानिए सीटी स्कैन और रेमडेसिविर को लेकर क्या कहा

सार

कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस(DGHS) ने एक नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें अति आवश्यक होने पर ही सीटी स्कैन करने की सलाह दी गई है, जबकि रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग पर बैन लगा दिया है। ऐसे बच्चों में कोरोना के लक्षण का पता करने 6 मिनट के वॉक टेस्ट की सलाह दी गई है।

नई दिल्ली. यह राहत की बात रही कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में बच्चे कम प्रभावित हुए। बावजूद केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सतर्क रहने की सलाह दी है। साथ ही एक नई गाइडलाइन जारी की है, जिसमें कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज और संक्रमण का पता करने से जुड़े दिशा-निर्देश हैं। इस गाइडलाइन में मुख्यत: तीन बातों पर फोकस किया गया है। पहला-अति आवश्यक होने पर ही कोरोना संक्रमित बच्चों का सीटी स्कैन करने को कहा गया है। सामान्य स्थिति में इससे बचने की सलाह दी गई है। दूसरा-बच्चों पर रेमडेसिविर इंजेक्शन के उपयोग की मनाही कर दी गई। तीसरी सलाह यह दी गई है कि बच्चों में संक्रमण की स्थिति का पता करने 6 मिनट के वॉक टेस्ट किया जा सकता है।

स्टेरॉयड का इस्तेमाल हो सकता है घातक
DGHS ने कहा है कि बच्चों के मामूली लक्षण वाले केस (asymptomatic) में स्टेरॉयड का इस्तेमाल जिंदगी के लिए ठीक नहीं है। यह नुकसान पहुंचा सकता है। DGHS ने कहा है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर रेमडेसिविर को लेकर अभी ऐसी कोई रिसर्च या आंकड़ा सामने नहीं आया है, जिससे पता चले कि यह सुरक्षित और प्रभावी है। ऐसे में इससे बचें।

6 मिनट के वॉक टेस्ट की सलाह
DGHS ने सलाह दी है कि 12 साल से बड़े बच्चों में कोरोना संक्रमण का पता लगाने 6 मिनट का वॉक टेस्ट अपनाया जाए। यानी बच्चों की उंगुली पर पल्स ऑक्सिमीट लगाकर उसे 6 मिनट तक टहलने को कहा जाए। इसके बाद ऑक्सिजन सैचुरेशन लेवल चेक करें। इससे हैप्पी हाइपोक्सिया का पता चलेगा। 

दरअसल, ब्लैक फंगस के बीच हैप्पी हाइपोक्सिया के मामले सामने आए थे। इसमें जिन मरीजों में कोरोना के लक्षण नहीं होते, उनका ऑक्सीजन लेवल अचानक गिरने लगता है और मौत का कारण बन जाता है। DGHS  ने कुछ अन्य सुझाव भी दिए हैं। जैसे- मॉस्क अनिवार्य रूप से पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें। इम्यूनिटी बढ़ाने पौष्टिक खान-पान पर ध्यान दें। हल्के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह पर पेरासिटामोल ली जा सकती है। खराश या खांसी होने पर गर्म पानी से गरारे करें और हल्के लक्षण दिखने पर ऑक्सीजन से संबंधित कोई थैरेपी करें।

Asianet News का विनम्र अनुरोधः आइए साथ मिलकर कोरोना को हराएं, जिंदगी को जिताएं...। जब भी घर से बाहर निकलें मास्क जरूर पहनें, हाथों को सैनिटाइज करते रहें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। वैक्सीन लगवाएं। हमसब मिलकर कोरोना के खिलाफ जंग जीतेंगे और कोविड चेन को तोडेंगे। #ANCares #IndiaFightsCorona

यह भी पढ़ें
DCGI ने 2-18 साल के बच्चों पर COVAXIN के दूसरे-तीसरे ट्रायल की मंजूरी दी, 525 बच्चों पर होगा परीक्षण
भारत में बच्चों के लिए तैयार हो रही यह दो वैक्सीन, नेजल वैक्सीन भी बच्चों के लिए सेफ
कोरोना में क्यों बढ़ने लगा है लोगों का ब्लड शुगर, संक्रमण का खतरा 30% ज्यादा, जानें बचने का तरीका
COVID-19: बच्चों पर वैक्सीन ट्रायल प्रारंभ, छह माह के नवजातों के लिए भी जल्द वैक्सीन

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

बाइक पर पत्नी ने 27 सेकेंड में पति को जड़े 14 थप्पड़, देखें Viral Video
Viral Road Rage Video: HR नंबर प्लेट Thar के कारनामें ने इंटरनेट पर मचाई खलबली