
नई दिल्ली। पड़ोसी की दीवार तोड़ने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने एक व्यक्ति को 45 दिन जेल की सजा सुनाई है। कोर्ट के आदेश पर दीवार का निर्माण किया गया था। इसके बाद भी दोषी व्यक्ति ने उसे तोड़ दिया। हाईकोर्ट ने इसे अदालत की अवमानना के रूप में लिया और अवमाननाकर्ता को 45 दिनों के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने एक आदेश में कहा कि अवमानना क्षेत्राधिकार का उद्देश्य अदालतों की महिमा और गरिमा को बनाए रखना है। अदालतों द्वारा दिए गए सम्मान और अधिकार एक सामान्य नागरिक के लिए सबसे बड़ी गारंटी हैं। समाज को कड़ा संदेश देना होगा कि मजबूत हथकंडे अपनाकर कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है।
क्या है मामला?
बुराड़ी गांव में निर्मल जिंदल की संपत्ति की चारदीवारी का निर्माण दिसंबर 2020 में एक संपत्ति विवाद मामले में अदालत के आदेश के आधार पर किया गया था। अवमानना करने वाले श्याम सुंदर त्यागी ने 3 जनवरी को चारदीवारी को गिरा दिया था। एक दिन बाद पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की और चार मई को तीस हजारी अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
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अवमानना की कार्यवाही में अदालत ने 7 मार्च को त्यागी को अदालत की अवमानना का दोषी पाया और उनकी माफी को इस आधार पर खारिज कर दिया कि अदालत के आदेशों की धज्जियां उड़ाने के लिए जानबूझकर विध्वंस किया गया था। अदालत को बताया गया कि जिंदल की संपत्ति त्यागी की संपत्ति से सटी हुई है और उनके बीच सीमांकन को लेकर विवाद है।
उनके वकील ने अदालत को बताया कि विध्वंस इसलिए किया गया क्योंकि त्यागी इस गलतफहमी में थे कि उनकी जमीन पर दीवार बनाई गई है। हालांकि अदालत ने पाया कि अक्टूबर 2020 में दीवार के निर्माण का आदेश त्यागी की उपस्थिति में पारित किया गया था और अब वह उस क्षेत्र के बारे में अनभिज्ञता का अनुरोध नहीं कर सकता जहां चारदीवारी का निर्माण किया गया है।
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