
PM Modi Adressing the Rajya Sabha: पीएम मोदी गुरुवार को राज्यसभा में आक्रामक मूड में नजर आए। नारेबाजी के बीच प्रधानमंत्री ने कभी सीना ठोकते हुए तो कभी शायराना अंदाज में विपक्ष को आईना दिखाया। करीब 85 मिनट के अपने भाषण में पीएम ने नेहरु-गांधी परिवार, आर्टिकल 356 समेत कई मुद्दों पर विपक्ष को चारों खाने चित कर दिया। पीएम ने कहा- कुछ लोगों को नारे बोलने के लिए भी लोग बदलने पड़ रहे हैं। मैं अकेला ही घंटेभर से बोल रहा हूं। इसी तरह पीएम मोदी ने शायराना अंदाज में और कई बातें कहीं।
1- कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल...जो भी जिसके पास था, उसने दिया उछाल
पीएम मोदी जैसे ही राज्यसभा भाषण देने के लिए खड़े हुए, विपक्ष ने नारेबाजी और हंगामा शुरू कर दिया। 'मोदी-अडाणी भाई-भाई' के नारे लगाए। इस पर मोदी ने शायराना अंदाज में विपक्ष को जवाब देते हुए कहा- कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल...जो भी जिसके पास था, उसने दिया उछाल। और अच्छा ही है, जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही ज्यादा खिलेगा। वैसे, कमल खिलाने में आपका प्रत्यक्ष, परोक्ष जो भी योगदान है, इसके लिए मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं।
2- ऐसा कोई पाप मत कीजिए, जो आपके बच्चों के अधिकारों को छीन ले
पीएम मोदी ने कांग्रेस को घेरते हुए आगे कहा- इनकी सोच है कि कर्जा ले लिया जाए, भुगतान आने वाली पीढ़ी करेगी। कर्ज लेकर घी पीने वाले न सिर्फ राज्य को तबाह करेंगे, बल्कि देश को भी बर्बाद कर देंगे। पड़ोसी देशों को देखिए, दुनिया में उन्हें कोई कर्ज देने के लिए राजी नहीं हैं। देश की आर्थिक सेहत के साथ खिलवाड़ मत कीजिए। आप ऐसा कोई पाप मत कीजिए, जो आपके बच्चों के अधिकारों को छीन ले।
3- लोगों को नारे बोलने में भी (सांसद) बदलने पड़ रहे, इधर घंटे भर से आवाज दबी नहीं है..
विपक्ष की नारेबाजी के बीच भी पीएम मोदी ने अपना भाषण जारी रखा। उन्होंने कहा- हमने सामाजिक न्याय, दो वक्त की रोटी जैसी दिक्कतों का समाधान निकाला है, आपने इसका सॉल्यूशन नहीं निकाला था। मोदी ने सीना ठोकते हुए कहा- देश देख रहा है, एक अकेला कितनों पर भारी पड़ रहा है। नारे बोलने के लिए भी इनको (सांसद) बदलने पड़ रहे हैं और इधर घंटे भर से आवाज दबी नहीं है।
4- सालों बाद किसी का खाता बंद हो जाए, तो उनकी पीड़ा मैं समझ सकता हूं
पीएम मोदी ने आगे कहा- खड़गे जी शिकायत कर रहे थे कि मोदी जी बार-बार मेरे चुनावी क्षेत्र कलबुर्गी आ जाते हैं। मैं आता हूं, लेकिन शिकायत करने से पहले ये भी तो देखो कि कर्नाटक में एक करोड़ 70 लाख जनधन खाते खुले हैं। उन्हीं के इलाके में 8 लाख से ज्यादा खाते खुल चुके हैं। अब अगर इतने खाते खुल जाएं, लोगों को ताकत मिल जाए, वो जागरुक हो जाएं और किसी का इतने सालों बाद खाता बंद हो जाए तो उनकी पीड़ा मैं समझ सकता हूं। बार-बार उनका दर्द झलकता है। मैं तो हैरान हूं, कभी-कभी तो यहां तक कह देते हैं कि एक दलित को हरा दिया। अरे भाई उसी इलाके की जनता जनार्दन है, उसने दूसरे दलित को जिता दिया। अब आपको जनता नकार रही है, आपका खाता बंद कर रही है और आप रोना यहां रो रहे हो।
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