Jammu-Kashmir: घाटी की सबसे कम उम्र की लेखिका बुशरा निदा ने लिखी तीसरी किताब, समझाया आइंस्टीन का समीकरण

Published : Dec 10, 2021, 08:28 AM ISTUpdated : Dec 10, 2021, 08:33 AM IST
Jammu-Kashmir: घाटी की सबसे कम उम्र की लेखिका बुशरा निदा ने लिखी तीसरी किताब, समझाया आइंस्टीन का समीकरण

सार

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले के कनिपोरा गांव की बुशरा निदा घाटी की सबसे कम उम्र की लेखिका हैं। 12वीं क्लास में पढ़ने वाली बुशरा ने तीन किताबें लिखी हैं।

जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के कुलगाम जिले के कनिपोरा गांव की बुशरा निदा (Bushra Nida) घाटी की सबसे कम उम्र की लेखिका हैं। 12वीं क्लास में पढ़ने वाली बुशरा ने तीन किताबें लिखी हैं। लेखन के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले हैं। बुशरा निदा ने बताया है कि मुझे कविताएं लिखने की प्रेरणा ऐनी फ्रैंक से मिली है। 

16 साल की बुशरा ने हाल ही में अल्बर्ट आइंस्टीन के समीकरण E=mc² पर अपनी तीसरी किताब प्रकाशित की है। इसमें उन्होंने कविता के माध्यम से आइंस्टीन के समीकरण को समझाया है। इससे पहले उन्होंने 'ट्यूलिप ऑफ फीलिंग्स' और 'द डेवी' (आवर्त सारणी के तत्वों का पोएटिक रेंडिशन) किताब लिखा था। बुशरा को लेखन से घाटी में काफी प्रसिद्धि मिली है। उन्हें पहली और दूसरी किताब के लिए पुरस्कार भी मिला था। 

'ट्यूलिप ऑफ फीलिंग्स' किताब को 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' ने सराहा था। वहीं, 'द डेवी' (पोएटिक रेंडिशन ऑफ एलिमेंट्स ऑफ पीरियोडिक टेबल) किताब को विश्व स्तर पर सराहा गया था। इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के रूप में भी रजिस्ट्रर किया गया है। बुशरा को इस किताब के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया गया है। 'द डेवी' के लिए बुसरा को 'इंटरनेशनल कलाम का गोल्डन अवार्ड 2021' मिला था।

विज्ञान विषयों पर लिखती हैं बुशरा
बुशरा निदा कुलगाम जिले के कनिपोरा बस्ती की रहने वाली हैं। उन्होंने काव्यात्मक अंदाज में किताबें लिखी हैं। वह विज्ञान विषयों पर लिखना पसंद करती हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था कि E=mc² उनका तीसरा प्रकाशन है। इसमें मैंने समीकरण को सरल शब्दों में अच्छी तरह से समझाया है। बुशरा ने कहा कि जिस समय मैंने अपनी पहली पुस्तक लिखी थी मेरे पिता एक घातक बीमारी से लड़ रहे थे। मैंने किताब उन्हें मुझ पर गर्व महसूस कराने के लिए लिखा था।

अपनी नई किताब E=mc² के बारे में बुशरा ने कहा कि मुझे इसे पूरा करने में लगभग तीन महीने लगे। फॉर्मूला पूरी तरह से समझने और फिर इसे कविता का रूप देने के लिए मुझे बहुत शोध करना पड़ा। मेरी नई पुस्तक दो भागों में है। पहले में आइंस्टीन की जीवन की उपलब्धियां और दूसरे में उनका E=mc² समीकरण है।

 

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