
केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि महिला के शरीर की बनावट पर टिप्पणी करना या उसकी शारीरिक विशेषताओं पर या किसी प्रकार की टिप्पणी करना यौन उत्पीड़न के समान है। अदालत ने इस तरह की टिप्पणियों को महिला के सम्मान और गरिमा का उल्लंघन करार दिया और इसे गंभीर अपराध माना। ये निर्णय न्यायमूर्ति ए. बदरुद्दीन के द्वारा दिया गया है।
ये मामला केरल राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड (केएसईबी) के एक पूर्व कर्मचारी से जुड़ा है, जिसने कथित तौर पर केएसईबी में एक वरिष्ठ सहायक पर टिप्पणी की थी और महिला को फोन पर कई आपत्तिजनक मैसेज भेजे थे। इसके लिए आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A(1)(iv) और 509 के तहत आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा, आरोपी पर इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से उपद्रव करने के लिए केरल पुलिस (KP) अधिनियम की धारा 120(o) भी लगाई गई। हालांकि आरोपी के वकील का तर्क था कि किसी के शरीर की संरचना टिप्पणी करना यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए साफ किया कि किसी महिला पर ऐसी टिप्पणी न केवल उसके सम्मान के खिलाफ है, बल्कि यह यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आती है।
केरल हाई कोर्ट के इस फैसले ने महिलाओं के अधिकार और सम्मान के मुद्दे पर एक मजबूत संदेश दिया है। यह निर्णय न केवल कानूनी दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में भी एक बड़ी पहल है।
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