
नई दिल्ली। चीन (China) के साथ नजदीकी बढ़ा रहा नेपाल (Nepal) भी अब सीमा को लेकर विवाद खड़े करना शुरू कर दिया है। दो दिन पहले शुरू हुई नेपाल की 12वीं जनगणना (12th Census) में वह कई भारतीय इलाकों व गांवों में सर्वे करा रहा है। नेपाल के सेंट्रल स्टैटिक्स ब्यूरो (CSB) के महानिदेशक नेबिन लाल श्रेष्ठ बताते हैं कि हम देश के अधिकारिक मानचित्र में शामिल सभी जगहों पर जनगणना करेंगे। हालांकि, भारत ने नेपाल की इस हिमाकत पर दो टूक कहा है कि नेपाल अपनी हदों को न लांघे। भारतीय क्षेत्र में किसी प्रकार का सर्वे या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या है विवाद?
नेपाल से सटे भारतीय क्षेत्र हैं लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा। यह भारत का अधिकारिक क्षेत्र है और भारतीय कानून ही यहां प्रभावी है। लेकिन नेपाल भारतीय क्षेत्र के लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है।
मई 2020 में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिपुलेख से होकर कैलाश मानसरोवर रोड के लिंक का उद्घाटन किया था। भारत सरकार के इस कदम के बाद नेपाल ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराते हुए उसे अपना क्षेत्र बता दिया। नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी ओली इन क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताते हुए नया नक्शा तक जारी कर दिया था। हद तो यह कि इस नक्शे को मान्यता देने के लिए संविधान तक में संशोधन नेपाली संसद ने कर दी।
12वीं जनगणना में इन क्षेत्रों में सर्वे भी करने का कर रहा दावा
नेपाल में हर दस साल में जनगणना होता है। इस साल यह जनगणना शुरू हुआ है। दो दिन पहले यानी 11 नवम्बर से शुरू हुए सेंसक्स सर्वे में नेपाल भारतीय क्षेत्र जिसे वह अपना बता रहा, का भी सर्वे करने जा रहा है। हालांकि, भारत सरकार ने साफ तौर पर भारतीय क्षेत्र में जाने से रोक दिया है लेकिन नेपाल के अधिकारी दूसरे तरीकों से सर्वे करने पर आमादा हैं।
नेपाल के सेंट्रल स्टैटिक्स ब्यूरो (सीएसबी) के महानिदेशक नेबिन लाल श्रेष्ठ ने बताया कि हम देश के अधिकारिक मानचित्र में शामिल सभी जगहों पर जनगणना करेंगे। भारत के मना करने पर हम दूसरे विकल्प का इस्तेमाल करेंगे। सैटेलाइट चित्रों की मदद से क्षेत्र का सर्वे कर घरों और सदस्यों का अनुमान लगाएंगे।
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