
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भारत खिलौना मेला 2021 का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, ये हम सब के लिए आनंद की बात है कि आज हम देश के पहले खिलौना मेले की शुरुआत का हिस्सा बन रहे हैं। ये केवल एक व्यापारिक और आर्थिक कार्यक्रम नहीं है, ये देश की सदियों पुरानी खेल और उल्लास की संस्कृति को मजबूत करने की एक कड़ी है।
"सिंधुघाटी सभ्यता, मोहनजोदाड़ो और हड़प्पा के दौर के खिलौनों पर पूरी दुनिया ने रिसर्च की है। प्राचीन काल में दुनिया के यात्री जब भारत आते थे, तो भारत में खेलों को सीखते भी थे और अपने साथ लेकर भी जाते थे।"
पीएम ने शतरंज और लूडो का इतिहास बताया
"आज जो शतरंज दुनिया में इतना लोकप्रिय है, वो पहले ‘चतुरंग या चादुरंगा’ के रूप में भारत में खेला जाता था। आधुनिक लूडो तब ‘पच्चीसी’ के रुप में खेला जाता था। हमारे धर्मग्रन्थों में भी बाल राम के लिए अलग-अलग कितने ही खिलौनों का वर्णन मिलता है।"
"भारतीय खेल और खिलौनों की ये खूबी रही है कि उनमें ज्ञान होता है, विज्ञान भी होता है, मनोरंजन होता है और मनोविज्ञान भी होता है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्ले-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है।"
पीएम मोदी ने बताया खिलौने का महत्व
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर की एक कविता की पंक्तियां दोहराई। उन्होंने कहा, "एक खिलौना बच्चों को खुशियों की अनंत दुनिया में ले जाता है। खिलौने का एक-एक रंग बच्चे के जीवन में कितने ही रंग बिखेरता है।"
पिछले साल मन की बात कार्यक्रम में पीएम ने किया था खिलौने का जिक्र
पीएम मोदी ने पिछले साल अगस्त 2020 में अपने खिलौने का जिक्र 'मन की बात' कार्यक्रम में किया था। उन्होंने कहा था कि खिलौने न केवल क्रियाशीलता बढ़ाते हैं बल्कि महत्वाकांक्षाओं को पंख भी लगाते हैं। बच्चों के मस्तिष्क विकास में खिलौने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मनोवैज्ञानिक गतिविधि तथा ज्ञान की कुशलता बढ़ाने में बच्चों की मदद करते हैं। बच्चे के समग्र विकास में खिलौनों के महत्व की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने पहले भी भारत में खिलौनों के उत्पादन को बढ़ाने पर बल दिया है।
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