
2000 Notes Exchange. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रजिस्ट्री से 2000 के नोट बदलने से जुड़ी याचिकाओं की तत्काल लिस्टिंग रिपोर्ट मांगी है। इन याचिकाओं में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 2000 के नोट बदलने की स्वीकृति को चैलेंज किया गया है। याचिकाओं में यह भी है कि बिना किसी अनुमति स्लीप या आईडी प्रूफ के 2000 रुपए के नोट बदलने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने दायर की याचिका
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरूद्ध बोस और राजेश बिंदल ने रजिस्ट्री से कहा कि याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिकाओं की लिस्टिंग रिपोर्ट हैंडओवर की जाए। इससे पहले एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय इस मुद्दे पर तत्काल सुनवाई की मांग कर चुके हैं। हालांक तब सुप्रीम कोर्ट यह कहते हुए तत्काल सुनवाई की बात नहीं मानी कि यह उतना भी अर्जेंट मैटर नहीं है और जुलाई में भी इसकी सुनवाई की जा सकती है। जुलाई में कोर्ट फिर से खुलेंगे। इसके बाद एडवोकेट उपाध्याय ने फिर से तत्काल सुनवाई की मांग की और कोर्ट से रिक्वेस्ट किया कि रजिस्ट्री रिपोर्ट देखी जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट खारिज कर चुका है याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह याचिका पहले खारिज कर दी जिसके बाद वकील अश्विनी उपाध्याय ने 29 मई को सुप्रीम कोर्ट का रूख किया। इससे पहले 19 मई को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ऐलान किया कि 2000 के नोट अब प्रचलन में नहीं रहेंगे। जिनके पास 2000 रुपए के नोट हैं, वे 30 सितंबर तक इसे बैंकों में बदलवा सकते हैं। इस पर याचिकाकर्ता का कहना है कि आरबीआई और एसबीआई के इस ऐलान पर तुरंत रोक लगनी चाहिए क्योंकि इससे अवैध धन को वैध बनाने का खेल किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि इस बात पर भी रोक लगनी चाहिए कि कोई बिना किसी आईडी प्रूफ और रिक्वेस्ट फॉर्म के यह नोट बदल सकता है।
हाईकोर्ट ने किस आधार पर खारिज की याचिका
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने अश्विनी उपाध्याय की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि यह सरकार का नीतिगत फैसला है। कोर्ट यहां इसलिए नहीं है कि सरकार के फैसलों के खिलाफ अपील अथॉरिटी की तरह काम करे। वकील ने याचिका में ने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे नोट या तो लोगों के लॉकर में हैं या फिर अलगाववादी, आतंकवादी, नक्सलवादी, ड्रग तस्कर, माइनिंग माफिया और भ्रष्ट लोगों के पास हैं।
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