Tribes India: दिल्ली हाट में सजी आदिवासियों की दुनिया, ऐसे-ऐसे खान-पान कि आप उंगुलियां चाटते रह जाएंगे

Published : Nov 22, 2021, 10:42 AM ISTUpdated : Nov 22, 2021, 10:54 AM IST
Tribes India: दिल्ली हाट में सजी आदिवासियों की दुनिया, ऐसे-ऐसे खान-पान कि आप उंगुलियां चाटते रह जाएंगे

सार

आदिवासियों की दुनिया(tribal world) वाकई अद्भुत होती है। उनकी जीवनशैली और खान-पान(lifestyle and food) सभी कुछ बाकी दुनिया से अलग होता है। अगर आप उनकी दुनिया में दिलचस्पी रखते हैं, तो दिल्ली हाट में चल रहे 'आदि महोत्सव (Aadi Mahotsav)' में आकर इसका लुत्फ उठा सकते हैं।

नई दिल्ली. आदिवासियों की दुनिया(tribal world) वाकई अद्भुत होती है। उनकी जीवनशैली और खान-पान(lifestyle and food) सभी कुछ बाकी दुनिया से अलग होता है। इसी दुनिया से लोगों को अवगत कराने जनजातीय शिल्प, संस्कृति और वाणिज्य(Tribal Crafts, Culture and Commerce) का उत्सव ‘आदि महोत्सव’दिल्ली हाट में 30 नवंबर तक सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक जारी है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आजादी का अमृत महोत्सव के तहत आयोजित समारोहों के अंतर्गत ‘आदि महोत्सव’ का आयोजन किया है, जिसका शुभारंभ 15 नवंबर को प्रधानमंत्री ने किया था, जिसे जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भी घोषित किया गया है। यानी आदि महोत्सव में जाकर 'वोकल फॉर लोकल' मुहिम का समर्थन करके आदिवासी सामान खरीदकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मदद कर सकते हैं। 

ये है दिल्ली हाट में खास..
आदिवासी जीवन के सबसे दिलचस्प पहलुओं में कई प्रकार के विशुद्ध आदिवासी व्यंजन शामिल हैं, जो विभिन्न जनजातियों के लिए अति महत्त्वपूर्ण चीज है। विशुद्ध आदिवासी व्यंजन नई दिल्ली में चल रहे ट्राइब्स इंडिया आदि महोत्सव दिल्ली हाट के आकर्षण का एक प्रमुख केंद्र है। राष्ट्रीय जनजातीय महोत्सव एक वार्षिक आयोजन है, जो देश भर के दिलचस्प व्यंजन प्रदर्शित करता है। दिल्ली हाट के आदि व्यंजन खंड में लोगों की भीड़ उमड़ रही है, जहां सिक्किम, उत्तराखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, नागालैंड, गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए हैं।

भारतीय आदिवासियों के खान-पान
आदिवासी समुदायों का प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध है; उनकी सादगी और प्रकृति के प्रति जो उनकी श्रद्धा है, वही श्रद्धा उनके खान-पान में झलकती है; आदिवासी अपने भोजन को पवित्र मानते हैं। आदिवासी लोगों का भोजन न केवल मजेदार होता है, बल्कि पौष्टिक और संतुलित भी होता है। चाहे राजस्थान की दाल बाटी चूरमा हो या झारखंड की लिट्टी चोखा या थपड़ी रोटी, या उत्तराखंड की कढ़ी हो, आदिवासी भोजन सरल, पौष्टिक और स्वादिष्ट होता है। आदिवासियों के बीच विभिन्न प्रकार के बाजरा को प्राथमिकता दी जाती है - इसलिए बड़े और छोटे बाजरा से बने व्यंजन उपलब्ध हैं जैसे झारखंड से रागी पकौड़े और मड़वा रोटी, तमिलनाडु से रागी इडली और डोसा।

लाल चींटी की चटनी
पिछले कुछ दिनों में यह देखा गया है कि कुछ व्यंजन दूसरों की तुलना में अधिक ध्यान आकर्षित करते हैं। चपड़ा की चटनी या लाल चींटी की चटनी के बहुत से लेने वाले थे। लाल चीटियों से बनी चपड़ा चटनी न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि बीमारियों को दूर रखने में भी मदद करती है। महुआ के व्यंजनों ने भी काफी लोगों का ध्यान खींचा है। महुआ के पेड़ आमतौर पर मध्य और पश्चिमी भारत के सभी जंगलों में पाए जाते हैं। महुआ चाय से लेकर महुआ शक्करपारा तक महुआ व्यंजन की लोकप्रियता आश्चर्य की बात नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों के अन्य अनोखे, स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों जैसे धुस्का (पीसे हुए चावल से बना गहरा तला हुआ नाश्ता), बंजारा बिरयानी, थपड़ी रोटी, हर्बल चाय और अरकू कॉफी का भी आनंद ले सकते हैं।

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