Delimitation Bill 2026: केंद्र सरकार अक्टूबर के अंत में विशेष संसद सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। DMK और छोटे दलों से समर्थन को लेकर बातचीत जारी है। जानें परिसीमन और 33% महिला आरक्षण का पूरा मामला।
Delimitation Bill: संसद के विशेष सत्र और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर राजधानी के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार अक्टूबर के आखिर में संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। सरकार का मुख्य मकसद प्रस्तावित परिसीमन और महिला आरक्षण कानूनों को पास कराने के लिए जरूरी संख्याबल जुटाना है। पिछली बार लोकसभा में दो-तिहाई विशेष बहुमत न मिल पाने के कारण यह संशोधन अटक गया था, इसलिए इस बार सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। आइए समझते हैं इस पूरे मामले के मुख्य बिंदु:
Delimitation Bill 2026: सरकार क्यों जुटा रही नंबर?
परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित कानून को संविधान संशोधन की जरूरत है। ऐसे में सरकार के लिए सामान्य बहुमत से ज्यादा महत्वपूर्ण दो-तिहाई विशेष बहुमत है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार को इस बार जरूरी संख्या जुटने का भरोसा है।
सरकार DMK समेत कुछ छोटे विपक्षी और क्षेत्रीय दलों के संपर्क में है।
विधेयक संसद में तभी लाने की संभावना है, जब सरकार को इसके पारित होने का पर्याप्त भरोसा हो।
अप्रैल में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक जरूरी विशेष बहुमत नहीं जुटा सका था।
Special Parliament Session: अक्टूबर के अंत में क्यों?
सूत्रों के मुताबिक, विशेष सत्र की संभावित तारीखें 26-27 अक्टूबर को होने वाले 12वें BRICS संसदीय फोरम को ध्यान में रखकर तय की जा सकती हैं।
सरकार करीब एक सप्ताह का नोटिस देकर सत्र बुला सकती है।
मानसून सत्र अभी तक औपचारिक रूप से स्थगित नहीं किया गया है।
सरकार पहले राजनीतिक समर्थन का अंतिम आकलन करना चाहती है।
इसके बाद ही सत्र और विधेयकों को लेकर औपचारिक कदम उठाया जा सकता है।
Women's Reservation: 33% कोटा और परिसीमन का कनेक्शन
2023 के 106वें संविधान संशोधन ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया था। इसका लागू होना परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है। 2026 में पेश प्रस्तावित संशोधनों का मकसद इस व्यवस्था को जल्द लागू करने का रास्ता बनाना है।
प्रस्तावित संविधान संशोधन महिलाओं के 33% आरक्षण को परिसीमन के साथ लागू करने की व्यवस्था में बदलाव करता है।
अलग Delimitation Bill आयोग के गठन और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का ढांचा देता है।
प्रस्तावित पैकेज में लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या बढ़ाने का प्रावधान भी है।
DMK समेत विपक्षी दलों से बातचीत क्यों?
परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की पार्टियां लंबे समय से प्रतिनिधित्व पर असर की आशंका जताती रही हैं। इसी वजह से सरकार के लिए क्षेत्रीय दलों का समर्थन अहम है।
फिलहाल तस्वीर इतनी है कि विधेयक सरकार के एजेंडे में है, लेकिन संसद में दोबारा पेश करने का फैसला संख्याबल और राजनीतिक समर्थन के भरोसे पर निर्भर करेगा।
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