
Hormuz Strait Supply Risk: हाल के डेटा और रिपोर्ट्स बताते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के अस्थायी कब्ज़े और नाकाबंदी की वजह से भारत की फर्टिलाइज़र सप्लाई चेन में लगभग 20–25 प्रतिशत रुकावट की संभावना बढ़ गई है। इसका सीधा असर यूरिया, DAP और पोटाश जैसे नाइट्रोजन फर्टिलाइज़र पर पड़ रहा है, जो भारतीय खेती के लिए बेहद ज़रूरी हैं।
ईरान पर 12 दिन से जारी US-इज़राइल युद्ध ने खाड़ी क्षेत्र की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। ड्रोन और असिमेट्रिक हमलों के कारण पारंपरिक शिपमेंट रास्ते बाधित हुए हैं। मिडिल ईस्ट और यूक्रेन के संघर्ष ने पहले ही भारत की 147 करोड़ आबादी को खाना खिलाने की क्षमता पर असर डाला था।भारत की फर्टिलाइज़र इंपोर्ट का अधिकांश हिस्सा UAE, कतर, सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों से आता है। यूरिया का लगभग 63% और DAP का 32% इसी क्षेत्र से भारत आता है। पोटाश का करीब 42% सऊदी अरब से इंपोर्ट होता है। ये सभी शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट के जरिए भारत पहुंचते हैं।
इस 20–25% संभावित कमी का असर केवल फर्टिलाइज़र तक सीमित नहीं है। यह खेती पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था, रोज़गार और छोटे व्यापारों पर भी असर डाल सकता है। पहली फसल की बुआई जून–जुलाई में होती है, और अगर यूरिया या डीएपी की सप्लाई रुकती है, तो कृषि उत्पादन और फूड सिक्योरिटी पर संकट आ सकता है।
भारत ने अपने घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की योजना बनाई है। “मेक-इन-इंडिया” यूरिया प्रोडक्शन और 38 मिलियन टन सेल्फ-सफिशिएंसी टारगेट इसे संभव बना रहे हैं। वहीं रूस और चीन से इंपोर्ट विकल्प भी उपलब्ध हैं। हालांकि, प्राकृतिक गैस की कमी और खाड़ी देशों में शिपमेंट में बाधा लंबे समय तक चिंता का विषय बने रहेंगे।
सरकार ने फर्टिलाइज़र के स्टॉक को मजबूत और सुरक्षित बताया है। डिपार्टमेंट ऑफ़ फर्टिलाइज़र्स ने स्पष्ट किया कि मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट में कमी से यूरिया और नैचुरल गैस की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। S&P ग्लोबल के एनालिस्ट के मुताबिक, चुनावों से पहले सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि खेती करने वाले किसानों में नाराज़गी न हो और सप्लाई में कमी से फसल प्रभावित न हो।
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