
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंका ने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट की चिंता में डाल दिया है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है।
राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि सरकार ने विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करने के लिए 70,000 करोड़ रुपये की स्वदेशी जहाज निर्माण परियोजना शुरू की है। इस योजना के तहत आने वाले समय में 2500 स्वदेशी जहाज बनाए जाएंगे, ताकि भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति को ज्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर बना सके।
प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा कि भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं और देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। उन्होंने साफ शब्दों में बताया कि भारत में आने वाले पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशी जहाजों के जरिए आता है। ऐसे में जब भी दुनिया में कोई बड़ा संकट या युद्ध होता है, तो आपूर्ति शृंखला प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए सरकार ने स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 70,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य भारत को समुद्री परिवहन के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनाना है।
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सरकार की योजना के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग 2500 जहाज बनाए जाएंगे। इन जहाजों का इस्तेमाल कच्चे तेल, गैस और अन्य जरूरी सामानों के आयात-निर्यात में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत के पास अपने जहाजों का बड़ा बेड़ा होगा तो वैश्विक संकट के समय भी ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना आसान होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। भारत चाहता है कि इस क्षेत्र में तनाव कम हो और सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए निकले। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य युद्ध को कम करना और समुद्री व्यापार के लिए बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखना है। यह रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार फिलहाल सभी उपलब्ध स्रोतों से कच्चा तेल और गैस खरीदने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में भी यह प्रयास जारी रहेगा, ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति पर कोई बड़ा असर न पड़े। सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत पिछले कुछ वर्षों से रणनीतिक तेल भंडार भी बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश में 53 लाख मीट्रिक टन रणनीतिक तेल भंडार तैयार किए गए हैं। इसके अलावा 65 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता पर भी काम जारी है। इससे भविष्य में किसी बड़े वैश्विक संकट के दौरान देश के पास पर्याप्त तेल भंडार उपलब्ध रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी जहाज निर्माण योजना सिर्फ समुद्री क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा बड़ा कदम है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत विदेशी जहाजों पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और वैश्विक संकट के समय भी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रख पाएगा। तेजी से बदलते वैश्विक हालात के बीच यह फैसला भारत की दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है।
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