
Donald Trump vs JD Vance: क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को एक ऐसे मिशन पर भेजा था, जहां उनका फेल होना पहले से तय था? वाशिंगटन के गलियारों में अब यही सवाल गूंज रहा है। इस्लामाबाद में ईरान के साथ हुई बातचीत बेनतीजा खत्म हो गई है और जेडी वेंस सोमवार को खाली हाथ अमेरिका लौट आए हैं। अब डर यह है कि ट्रंप इस नाकामी का सारा ठीकरा वेंस के सिर फोड़ सकते हैं।
इसी महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस की एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने हंसी-मजाक में एक बड़ी बात कह दी थी। उन्होंने कहा था, 'अगर ईरान के साथ डील हो गई, तो सारा क्रेडिट मैं लूंगा। लेकिन अगर डील नहीं हुई, तो मैं जेडी वेंस को जिम्मेदार ठहराऊंगा।' तब तो यह बात मजाक लगी थी, लेकिन आज जब डील फेल हो गई है, तो लग रहा है कि ट्रंप ने पहले ही 'गेम' सेट कर दिया था। ट्रंप की पुरानी आदत रही है कि जब भी कुछ गलत होता है, वो अपने साथियों को ही दोषी ठहरा देते हैं।
हैरानी की बात यह है कि ट्रंप ने ईरान से बात करने के लिए किसी पुराने और अनुभवी डिप्लोमैट को नहीं भेजा। उन्होंने जेडी वेंस को चुना, जिनका व्हाइट हाउस में प्रभाव लगातार कम हो रहा है। जानकारों का मानना है कि वेंस और ट्रंप के बीच कई मुद्दों पर अनबन चल रही है और शायद इसीलिए उन्हें इस सबसे कठिन काम पर लगाया गया।
ईरान में अब सत्ता की कमान मुजतबा खामेनेई के हाथ में है, जो बेहद सख्त मिजाज माने जाते हैं। इस्लामाबाद की बातचीत में ईरान ने ऐसी मांगें रख दीं जिन्हें मानना नामुमकिन था, जैसे परमाणु प्रोग्राम बंद किए बिना सारी पाबंदियां हटाना, समुद्री रास्तों (Strait of Hormuz) पर टैक्स वसूलने का अधिकार। जब वेंस इन मांगों को सुलझा नहीं पाए, तो ट्रंप ने तुरंत रुख बदलते हुए ईरान की समुद्री नाकेबंदी का ऐलान कर दिया।
जेडी वेंस को कभी ट्रंप का उत्तराधिकारी माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। ट्रंप पहले ही अपनी टीम के कई खास लोगों (जैसे क्रिस्टी नोएम और पाम बोंडी) को बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं। हालांकि, अमेरिका में उपराष्ट्रपति को हटाना इतना आसान नहीं है, लेकिन अगर ट्रंप ने इस युद्ध और डील के फेल होने का दोष वेंस पर मढ़ दिया, तो वेंस का भविष्य में राष्ट्रपति बनने का सपना चकनाचूर हो सकता है।
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