16 साल के बच्चों ने खोल दिया मोर्चा! इटली में ऐसा क्यों भड़का युवाओं का गुस्सा?

Published : Oct 19, 2026, 06:54 PM IST
Italy PM Meloni condemns violent protests

सार

इटली में शिक्षा और हथियारों पर सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर युवाओं का विरोध हिंसक घटनाओं में बदल गया। ‘नो वेपंस’ के नारे के बीच पुलिस ने करीब 200 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें कई नाबालिग बताए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा की है।

यूरोप की राजनीति में एक बार फिर युवाओं की आवाज सड़कों पर सुनाई दे रही है। इटली में शिक्षा और सरकारी प्राथमिकताओं को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन हिंसक घटनाओं तक पहुंच गया। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं में बड़ी संख्या जेन-अल्फा की बताई जा रही है। शनिवार की घटनाओं के बाद पुलिस ने करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की है।

आखिर क्यों सड़कों पर उतरे Gen Alpha युवा?

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि सरकार शिक्षा की तुलना में हथियारों को ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसी नाराजगी के बीच ‘नो वेपंस’ जैसे नारे लगाए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इटली ने 2024 में GDP का करीब 4 फीसदी शिक्षा पर खर्च किया, जो लगभग 97 अरब डॉलर के बराबर था। इसी साल हथियारों की खरीद पर करीब 30 अरब डॉलर खर्च किए गए, जबकि कुल रक्षा खर्च लगभग 50 अरब डॉलर बताया गया। युवाओं का सवाल है कि जब शिक्षा और भविष्य से जुड़े मुद्दे गंभीर हैं, तो रक्षा पर बढ़ता खर्च सरकार की प्राथमिकता क्यों बन रहा है?

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200 लोगों की गिरफ्तारी, मेलोनी ने बताया ‘दंगाई’

शनिवार के प्रदर्शन के दौरान आगजनी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुईं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 4,400 करोड़ रुपये की संपत्ति के नुकसान का दावा किया गया है। ANSA के अनुसार, रविवार को पुलिस ने लगभग 200 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें बड़ी संख्या 16 साल के नाबालिगों की बताई गई है। प्रधानमंत्री मेलोनी ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की और हिंसा में शामिल लोगों को देशहित के खिलाफ बताया। मेलोनी ने इस हिंसा के लिए वामपंथी नेताओं को भी जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को भड़काने वालों और हिंसा करने वाले समूहों को बख्शा नहीं जाएगा।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी बेचैनी?

इटली में 2027 में आम चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में युवाओं का यह विरोध सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। शिक्षा, रक्षा बजट और सरकार की प्राथमिकताएं आने वाले समय में चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा बन सकती हैं।

इटली के साथ फ्रांस में भी विरोध और हिंसा की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, दोनों देशों में घटनाओं के कारण और राजनीतिक संदर्भ अलग हैं। इटली में फिलहाल सवाल यही है कि क्या युवाओं का ‘नो वेपंस’ अभियान आने वाले चुनावों से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन पाएगा।

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