उतर गया अमेरिका से दोस्ती का सारा भूत, अब अपने किए पर क्यों पछता रहा पाकिस्तान?

Published : Feb 11, 2026, 10:32 PM IST

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार को संसद में अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपने हितों के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल किया और काम खत्म होने के बाद उसे 'टॉयलेट पेपर की तरह फेंक दिया।

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अफगानिस्तान की दो जंगों में पाकिस्तान की भूमिका

ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में दो जंगों में हिस्सा लिया। यह भागीदारी इस्लाम और मजहब के नाम पर बताई गई, लेकिन असल में उस समय के दो सैन्य शासकों जनरल जिया-उल-हक और जनरल परवेज मुशर्रफ ने वैश्विक ताकतों का समर्थन पाने के लिए यह फैसला किया।

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9/11 के बाद अमेरिका के साथ खड़े होने की कीमत

ख्वाजा आसिफ ने 1999 के बाद अमेरिका के साथ बनी नई रणनीतिक साझेदारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर 2001 के हमलों के बाद अमेरिका का साथ देने का जो फैसला लिया गया, उसकी कीमत पाकिस्तान आज भी चुका रहा है। उनके मुताबिक, उस दौर के फैसलों के कारण देश को लंबे समय तक सुरक्षा और आतंरिक हालात से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा।

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पाकिस्तान ने इतिहास से बहुत कुछ नहीं सीखा

रक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अपने इतिहास से पूरी तरह सबक नहीं लिया। उन्होंने कहा कि देश ने छोटे-छोटे फायदों के लिए कभी अमेरिका, कभी रूस और कभी ब्रिटेन की ओर झुकाव दिखाया। उन्होंने यह भी कहा कि आज इन देशों का पाकिस्तान में पहले से ज्यादा प्रभाव है, जबकि 30-40 साल पहले ऐसा नहीं था।

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पाकिस्तान का आतंकवाद से जुड़ा इतिहास रहा

ख्वाजा आसिफ ने माना कि पाकिस्तान का आतंकवाद से जुड़ा एक इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की दो जंगों में शामिल होना बड़ी भूल थी। उनके अनुसार, आज पाकिस्तान में जो आतंकवाद है, वह उन्हीं गलत फैसलों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि देश को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई संभव नहीं है।

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शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का दावा

आसिफ ने कहा कि इन युद्धों को सही ठहराने और समर्थन देने के लिए पाकिस्तान की शिक्षा प्रणाली में विशेष बदलाव किए गए थे। उस समय किए गए बदलाव आज भी शिक्षा व्यवस्था में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अक्सर अपनी गलतियों और इतिहास को स्वीकार करने से बचता रहा है।

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