
मेरठ (उत्तर प्रदेश). मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुख्य आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल के लिए अदालत ने फांसी की सजा का ऐलान किया। इस मामले में मौत की सजा सुनाए जाने के बाद देश में मृत्युदंड पाने वाली महिलाओं की चर्चा तेज हो गई है। भारत में कई महिलाओं को अदालत मौत की सजा सुना चुकी है, लेकिन मौत की सजा मिलना और वास्तव में फांसी पर चढ़ाया जाना अलग-अलग बातें हैं। इनमें से कई मामलों में ऊपरी अदालतों में सुनवाई अभी बाकी है।
उत्तर प्रदेश की शबनम को 2010 में अपने प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात सदस्यों की हत्या के मामले में मौत की सजा मिली। सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा बरकरार रखी, लेकिन अब तक उसे फांसी नहीं दी गई।
महाराष्ट्र की फेहमिदा सैयद को 2003 के मुंबई सीरियल बम धमाकों से जुड़े मामले में 2009 में मौत की सजा सुनाई गई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2012 में सजा बरकरार रखी, जबकि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है।
हरियाणा की सोनम डागर को 2009 में परिवार के कई सदस्यों की हत्या के मामले में 2014 में मौत की सजा मिली। हाई कोर्ट ने 2018 में सजा बरकरार रखी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फांसी पर रोक लगा दी।
छत्तीसगढ़ की किरण बाई को 2010 में एक बच्चे के अपहरण और हत्या के मामले में 2014 में मौत की सजा सुनाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने सजा बरकरार रखी, जबकि उनकी दया याचिका लंबित बताई गई है।
उत्तर प्रदेश की गीता देवी को 2010 में अपनी बहू और पोती की हत्या के मामले में 2021 में मौत की सजा सुनाई गई। उनकी सजा की पुष्टि के लिए मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित है।
उत्तर प्रदेश की जलधारा को 2017 में अपनी बेटी और उसके साथी की हत्या के मामले में 2022 में मौत की सजा मिली। मामला कथित ऑनर किलिंग से जुड़ा है और सजा की पुष्टि हाई कोर्ट में लंबित है।
उत्तर प्रदेश की रूपा सिंह को 2020 में परिवार के छह सदस्यों की हत्या के मामले में 2025 में मौत की सजा सुनाई गई। उनकी सजा की पुष्टि के लिए मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
केरल की ग्रीष्मा को 2022 में अपने प्रेमी की जहर देकर हत्या करने के मामले में 2025 में मौत की सजा मिली। उनकी अपील केरल हाई कोर्ट में लंबित है।
मध्य प्रदेश की कंचन कोल को 2022 में अपनी सास की हत्या के मामले में 2024 में मौत की सजा सुनाई गई। उनकी सजा की पुष्टि का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित है।
बिहार की पूनम देवी को 2023 में अपनी नाबालिग बेटी की हत्या के मामले में 2025 में मौत की सजा सुनाई गई। उनकी सजा की पुष्टि के लिए मामला पटना हाई कोर्ट में लंबित बताया गया है।
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