
Nisha Bhagat Death Case: रांची की आदिवासी नेत्री निशा भगत की संदिग्ध मौत के मामले में पिता ने पिठोरिया थानेदार और जमीन दलालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए FIR में क्या खुलासे हुए और पुलिस-लैंड माफिया गठजोड़ पर क्यों उठ रहे हैं सवाल।
जब कानून की रखवाली करने वाली वर्दी... जमीन के सौदागरों की भाषा बोलने लगे, तो इंसाफ की उम्मीद किससे की जाए? रांची की आदिवासी नेत्री निशा भगत की मौत का मामला अब सिर्फ एक सुसाइड या संदिग्ध मौत नहीं रहा... बल्कि यह सिस्टम के उस खूनी गठजोड़ की कहानी बन चुका है, जिसने एक उभरते हुए आदिवासी नेतृत्व को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
रांची के पिठोरिया इलाके में आदिवासियों की जमीन का खेल कोई नया नहीं है। लेकिन इस बार, शिकार बनीं खुद आदिवासियों के हक की आवाज उठाने वाली निशा भगत। निशा के पिता हांदू भगत ने पिठोरिया थाने में जो प्राथमिकी दर्ज कराई है, उसने झारखंड पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। क्योंकि इस FIR में कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि खुद पिठोरिया के थानेदार सतीश कुमार पांडेय मुख्य आरोपियों में से एक हैं।