"पागल, एहसान फरामोश"... किस बात पर नेतन्याहू को फोन कर इतना ज़लील कर गए ट्रंप?

Published : Jun 02, 2026, 11:58 PM IST
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सार

Trump Netanyahu Phone Call:डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कथित फोन कॉल में ऐसा क्या हुआ, जिसने दोनों नेताओं के रिश्तों को चर्चा में ला दिया? ईरान के साथ युद्धविराम और कूटनीतिक बातचीत को लेकर ट्रंप नेतन्याहू से नाराज क्यों बताए जा रहे हैं? अमेरिका में नेतन्याहू की लोकप्रियता और इजराइल की घरेलू राजनीति पर इस विवाद का क्या असर पड़ सकता है?

Trump Netanyahu Tensions: मध्य पूर्व की राजनीति में अमेरिका और इजराइल का रिश्ता हमेशा बेहद करीबी माना जाता रहा है। लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने इस साझेदारी को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान के साथ बढ़ते तनाव, युद्धविराम को लेकर असहमति और क्षेत्रीय कूटनीति के बदलते समीकरणों के बीच ऐसी खबर सामने आई है जिसने दुनिया भर का ध्यान खींच लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक फोन कॉल में तीखी नाराजगी जाहिर की। इतना ही नहीं, बातचीत में इस्तेमाल किए गए कथित शब्दों ने दोनों नेताओं के रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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फोन कॉल में क्या कहा गया?

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने लेबनान में हुए हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर नेतन्याहू से नाराजगी जताई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू की नीतियों की वजह से इजराइल की वैश्विक छवि प्रभावित हो रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ रहा है। हालांकि इस बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन इसके मीडिया में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

आखिर ट्रंप क्यों बताए जा रहे हैं नाराज?

ईरान के साथ समझौते की कोशिशों पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका लंबे समय से ईरान के साथ तनाव कम करने और बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन क्षेत्र में होने वाली सैन्य कार्रवाइयों से यह प्रक्रिया बार-बार प्रभावित होती रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन को लगता है कि ऐसे कदम ईरान के साथ संभावित कूटनीतिक समाधान को कमजोर कर सकते हैं।

ईरान युद्ध को लेकर आकलन गलत साबित हुआ?

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि युद्ध की शुरुआत में नेतन्याहू ने ईरान के भीतर राजनीतिक बदलाव की संभावनाओं का आकलन प्रस्तुत किया था। लेकिन जमीनी हालात अपेक्षा के अनुरूप नहीं बदले। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिका की रणनीतिक गणनाओं पर भी असर पड़ा और क्षेत्रीय स्तर पर नई चुनौतियां सामने आईं।

अमेरिका में घटती लोकप्रियता

अमेरिका में इजराइल और नेतन्याहू को लेकर सार्वजनिक राय भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हालिया सर्वेक्षणों में यह संकेत मिला है कि अमेरिकी मतदाताओं के एक वर्ग में नेतन्याहू को लेकर असंतोष बढ़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू राजनीति में बदलती यह धारणा भी अमेरिका-इजराइल संबंधों को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल हो सकती है।

चुनावी राजनीति और बढ़ता दबाव

इजराइल में प्रस्तावित चुनावों से पहले नेतन्याहू पहले से ही कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर उठे सवाल उनके लिए अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच रणनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते हैं, तो इसका असर इजराइली राजनीति पर भी पड़ सकता है।

क्या वास्तव में बदल रहे हैं अमेरिका-इजराइल संबंध?

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और इजराइल के बीच दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी किसी एक घटना से खत्म होने वाली नहीं है। हालांकि, क्षेत्रीय सुरक्षा, ईरान नीति और युद्धविराम जैसे मुद्दों पर मतभेद समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इस बार चर्चा इसलिए ज्यादा है क्योंकि कथित तौर पर दोनों नेताओं के बीच हुई निजी बातचीत सार्वजनिक बहस का हिस्सा बन गई है।

मध्य पूर्व में हालात लगातार बदल रहे हैं। ईरान, इजराइल, लेबनान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक और सैन्य गतिविधियां आने वाले दिनों में क्षेत्र की दिशा तय करेंगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विवाद केवल एक अस्थायी राजनीतिक तनाव है या फिर अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में किसी बड़े बदलाव का संकेत। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के कदम इस सवाल का जवाब दे सकते हैं।

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