
Trump SAVE America Act: अमेरिका में चुनावी सुधारों को लेकर बहस छिड़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में मतदाता पहचान पत्र (Voter ID) को अनिवार्य बनाने के लिए 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी' (SAVE) कानून को पास कराने की वकालत की है। इस दौरान ट्रंप ने भारत की विशालकाय चुनावी प्रक्रिया और वोटर वेरिफिकेशन की तारीफ करते हुए इसे एक वैश्विक बेंचमार्क बताया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में अमेरिकी प्रशासन से एक तीखा सवाल पूछा था-"आप अमेरिका में बिना किसी वैलिड फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे करा सकते हैं?" ट्रंप ने कहा कि भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सख्त नियम लागू हैं, जबकि अमेरिका में बिना पहचान पत्र के मतदान का तंत्र पारदर्शी चुनाव पर सवाल उठाता है।
Earlier this month, India’s Chief Election Commissioner, Gyanesh Kumar, asked our Administration — How can you have Elections in the U.S. without a valid Photo ID? India’s last Election had 646,000,000 Voters! Less than 1% voted by mail, and every single Voter had to have a VALID… pic.twitter.com/dWtL287nkk
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) August 17, 2026
डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि भारत के हालिया आम चुनाव में करीब 64.6 करोड़ (646 मिलियन) लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी डोनाल्ड ट्रंप की बात का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि भारतीय चुनावी मॉडल निष्पक्षता का बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में चुनावी अखंडता बनाए रखने के लिए कांग्रेस को तुरंत 'SAVE America Act' पास करना चाहिए।
President Donald J. Trump is absolutely correct! 646 MILLION voters, every single one required an ID in India’s last election. Congress should pass THE SAVE AMERICA ACT! pic.twitter.com/lqQHSZvWk7
— Ambassador Sergio Gor (@USAmbIndia) August 18, 2026
रिपब्लिकन पार्टी द्वारा पेश किए गए 'SAVE America Act' के प्रमुख प्रावधान:
व्हाइट हाउस का तर्क है कि भारत और ब्राजील जैसे बड़े लोकतंत्र बायोमेट्रिक और फोटो डेटाबेस का इस्तेमाल करते हैं, जबकि अमेरिका में सिर्फ स्व-सत्यापन (Self-attestation) पर वोट डाले जाते हैं। कानून को पारित कराने के लिए अमेरिकी सीनेट में राजनीतिक घमासान जारी है।
व्हाइट हाउस ने भारत और ब्राजील की चुनावी व्यवस्थाओं का भी हवाला दिया है। प्रशासन का दावा है कि इन देशों में मतदाता ID को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा जाता है, जबकि अमेरिका में कई जगह मतदाता पंजीकरण के दौरान नागरिकता संबंधी प्रक्रिया अलग तरीके से संचालित होती है। यही तुलना अब अमेरिकी चुनाव सुधार की बहस में भारत को एक महत्वपूर्ण उदाहरण बना रही है। हालांकि, भारत और अमेरिका की चुनावी प्रणालियां, कानून और मतदान प्रक्रियाएं अलग हैं, इसलिए दोनों की सीधी तुलना को उसके संदर्भ में देखना जरूरी है। फिलहाल ट्रंप का भारत का उदाहरण देना इस बात का संकेत है कि अमेरिका में अनिवार्य वोटर ID और नागरिकता प्रमाण का मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बना रह सकता है।
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