
US Iran Talks: मिडल ईस्ट (Middle East) में जारी भीषण बारूद और तबाही के बीच, दुनिया को अमन का रास्ता दिखाने वाली एक बेहद संवेदनशील डिप्लोमैटिक बातचीत ऐन वक्त पर पटरी से उतर गई है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए युद्ध को खत्म करने के लिए अभी दो दिन पहले ही एक 14-पॉइंट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर डिजिटल दस्तखत हुए थे। उम्मीद थी कि स्विट्जरलैंड के पहाड़ों पर होने वाली इस बैठक में एक पक्की शांति डील पर मुहर लग जाएगी। लेकिन शुक्रवार को होने वाली इस महा-बैठक के अचानक रद्द होने से पूरी दुनिया स्तब्ध है। इस घटना ने मिडल ईस्ट की नाजुक शांति को गहरे सस्पेंस और अनिश्चितता के भंवर में धकेल दिया है।
इस हाई-स्टेक डिप्लोमेसी का मंच बना था स्विट्जरलैंड का बेहद खूबसूरत और सुरक्षित बर्गेनस्टॉक माउंटेनटॉप रिज़ॉर्ट। कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड (कटारा हॉस्पिटैलिटी) के मालिकाना हक वाली यह जगह अपनी प्राइवेसी और कंट्रोल्ड एक्सेस के लिए जानी जाती है, जहां दुनिया के सबसे बड़े सीक्रेट इंटरनेशनल समिट होते रहे हैं। सस्पेंस तब गहराया जब व्हाइट हाउस ने अचानक घोषणा की कि अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा को टाल दिया गया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इसके पीछे 'पेचीदा लॉजिस्टिक्स' को जिम्मेदार ठहराया। खुद जेडी वेंस ने एक बयान में कहा, "ईरान कोई ऐसा देश नहीं है जिससे निकलना आसान हो। सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहां कब पहुंच पाता है।" न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट भी यही दावा करती है कि ईरानी टीम समय पर वेन्यू तक नहीं पहुंच सकी।
हालांकि, इस लॉजिस्टिकल देरी के पीछे एक बेहद खौफनाक और रणनीतिक वजह भी सामने आ रही है। एक्सियोस (Axios) के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया है कि ईरान ने यह कदम लेबनान में इजरायल द्वारा किए गए सीजफायर के कथित उल्लंघनों के विरोध में उठाया है। हिज्बुल्लाह से जुड़े पैन-अरब चैनल 'अल-मायादीन' के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी समझौते के बावजूद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर अपने हमले थामे नहीं हैं। गुरुवार की रात हुए इजरायली हमलों में 16 बेकसूर लोग मारे गए। तेहरान ने पहले ही साफ कर दिया था कि लेबनान में जब तक खूनखराबा पूरी तरह बंद नहीं होता, तब तक शांति की कोई भी बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
शांति वार्ता टलने के पीछे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का वह अड़ियल रुख भी है जिसने आग में घी का काम किया है। नेतन्याहू ने साफ लफ्जों में कहा है कि इजरायल की सेना दक्षिणी लेबनान के "सिक्योरिटी ज़ोन" में तब तक डटी रहेगी, जब तक इजरायल की सुरक्षा के लिए इसकी जरूरत होगी। इजरायल के इस आक्रामक रवैये ने कतर और अमेरिका की मध्यस्थता की कोशिशों को तगड़ा झटका दिया है, क्योंकि ईरान इसे सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन मान रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू अमेरिकी वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस की प्रेस कॉन्फ्रेंस रही, जिसमें उन्होंने इजरायली लीडरशिप की सरेआम धज्जियां उड़ा दीं। वेंस के इस बयान से साफ हो गया है कि वॉशिंगटन और उसके सबसे पुराने सहयोगी इजरायल के बीच दरारें अब खाई में बदल चुकी हैं। वेंस ने इजरायली कैबिनेट को चेतावनी देते हुए कहा: "डोनाल्ड जे. ट्रम्प दुनिया के एकमात्र ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जो इस समय इजरायल के प्रति सहानुभूति रखते हैं... अगर मैं इजराइली सरकार की कैबिनेट में होता, तो मैं शायद उस एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी (अमेरिका) पर हमला या उसकी अवहेलना नहीं करता, जो मेरे पास पूरी दुनिया में बचा है।"
| समझौता/MoU बिंदु | समय सीमा/स्थिति |
| परमाणु कार्यक्रम पर पक्की समझ | 60 दिनों के भीतर बातचीत पूरी करनी है। |
| होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) | तेल ट्रैफिक को युद्ध से पहले के स्तर पर लाना। |
| खामेनेई का दावा | अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'निराशा' में आकर यह डील की है। |
ईरान के सुप्रीम लीडर, मोजतबा खामेनेई ने हालांकि अमेरिका के साथ इस सीधी बातचीत का समर्थन किया है, लेकिन उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने हताशा और निराशा में आकर अपने सभी हथकंडे अपनाकर इस डील को करने की कोशिश की थी। बहरहाल, 60 दिनों की यह मोहलत अब और पेचीदा हो गई है। अगर यह बातचीत जल्द ही दोबारा शुरू नहीं हुई, तो होर्मुज जलडमरूमध्य का समुद्री रास्ता और मिडल ईस्ट की धरती एक बार फिर महायुद्ध की आग में स्वाहा हो सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच 14-बिंदु समझौते के बाद उम्मीद जगी थी कि दशकों पुरानी दुश्मनी धीरे-धीरे बातचीत में बदल सकती है। लेकिन स्विट्जरलैंड वार्ता के टलने से यह साफ हो गया है कि शांति का रास्ता अभी भी बेहद नाजुक है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्ष जल्द नई तारीख तय करेंगे, या फिर लेबनान, इज़राइल और क्षेत्रीय राजनीति की उलझनें इस संभावित शांति प्रक्रिया को फिर से अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल देंगी।
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