
Trump Xi Meeting: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिन की राजकीय यात्रा पर वॉशिंगटन पहुंच चुके हैं। एक दशक से अधिक समय बाद अमेरिका की उनकी पहली स्टेट विजिट ऐसे वक्त हो रही है, जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और ईरान जैसे मुद्दों पर तनाव बना हुआ है। लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा मुद्दा है, जो बातचीत की पूरी दिशा प्रभावित कर सकता है-रेयर अर्थ और अहम खनिजों पर चीन का नियंत्रण।
शी जिनपिंग के ज्वाइंट बेस एंड्रयूज़ पहुंचने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद टारमैक पर उनके स्वागत के लिए मौजूद रहे। रेड कार्पेट, सैन्य सम्मान और दोनों नेताओं की साथ-साथ मौजूदगी ने इस यात्रा को सामान्य राजकीय यात्रा से अलग बना दिया। समारोह में B-2 स्पिरिट और चार F-22 रैप्टर का फ्लाईओवर भी हुआ। इससे पहले मई में ट्रंप बीजिंग गए थे। अब वॉशिंगटन में शी के स्वागत के लिए दिखाया गया यह प्रोटोकॉल दोनों देशों के संबंधों में मौजूदा जटिल समीकरणों को भी सामने लाता है।
WATCH: Chinese President Xi Jinping receives a high-profile welcome in Washington as President Donald Trump greets him with full ceremonial honours — a 100-foot red carpet, salute battery, 21-person honor cordon, US-China flags, national anthems, military formations, B-1 flyovers…
— Shalinder Wangu (@Wangu_News18) September 24, 2026
रेयर अर्थ 17 तत्वों का समूह है, जिनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों, स्मार्टफोन, एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और आधुनिक सैन्य उपकरणों में होता है। खास बात यह है कि चीन सिर्फ इनके खनन में ही नहीं, बल्कि रिफाइनिंग, प्रोसेसिंग और मैग्नेट निर्माण में भी बहुत बड़ी हिस्सेदारी रखता है। Reuters के अनुसार चीन वैश्विक रेयर-अर्थ माइनिंग का 70% तक, रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 85% और रेयर-अर्थ मेटल अलॉय व मैग्नेट उत्पादन का करीब 90% नियंत्रित करता है। यही निर्भरता अमेरिका के लिए रणनीतिक चिंता बनती है।
यहीं से इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल निकलता है। आधुनिक मिसाइल, विमान, ड्रोन, रडार और अन्य रक्षा प्रणालियों में कई तरह के अहम खनिजों और विशेष मैग्नेट की जरूरत होती है। अगर सैन्य अभियानों की अवधि और हथियारों की मांग बढ़ती है, तो इन सामग्रियों की सप्लाई भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में अमेरिकी रक्षा उद्योग के लिए चीन से आने वाली आपूर्ति में बड़ी रुकावट केवल व्यापार का मुद्दा नहीं रहेगी, बल्कि यह औद्योगिक और सुरक्षा चुनौती बन सकती है।
अमेरिका और चीन के बीच पिछले व्यापार तनाव के दौरान बीजिंग ने रेयर-अर्थ निर्यात पर प्रतिबंध और नियंत्रण कड़े किए थे। इससे वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ी थी। इस बार भी वॉशिंगटन चाहता है कि चीन रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाए। दूसरी ओर, बीजिंग अमेरिका से अपनी कंपनियों पर तकनीकी प्रतिबंधों में राहत चाहता है। यानी बातचीत में समीकरण कुछ ऐसा है-अमेरिका के पास एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और चिप्स की ताकत, जबकि चीन के पास कई अहम खनिजों की सप्लाई चेन पर मजबूत पकड़।
ट्रंप-शी वार्ता में रेयर अर्थ के अलावा व्यापार और टैरिफ सबसे अहम मुद्दों में रहेंगे। दोनों देशों के बीच मौजूदा टैरिफ ट्रूस नवंबर में खत्म होने वाला है, इसलिए आगे की दिशा पर बाजारों की नजर है। इसके साथ AI, ताइवान, ईरान और यूक्रेन से जुड़े मुद्दे भी बातचीत के एजेंडे में हैं। अमेरिका चीन से रेयर-अर्थ सप्लाई को लेकर आश्वासन चाहता है, जबकि चीन एडवांस्ड अमेरिकी तकनीक तक अपनी पहुंच पर लगे प्रतिबंधों में बदलाव की मांग कर रहा है।
ताइवान इस वार्ता का सबसे संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों में से एक है। बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान दशकों से अलग प्रशासन के तहत स्वशासित है। अमेरिका ताइवान को हथियार उपलब्ध कराता रहा है और चीन इसका विरोध करता है। ईरान भी समीकरण को और जटिल बना रहा है। अमेरिकी-ईरान संघर्ष के बीच चीन के ईरान के साथ आर्थिक संबंधों पर भी वॉशिंगटन की नजर है। ऐसे में ट्रंप-शी बातचीत सिर्फ अमेरिका-चीन व्यापार तक सीमित नहीं रहने वाली।
इस शिखर बैठक में कोई बड़ा समझौता होता है या सिर्फ मौजूदा तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश-इस पर पूरी दुनिया की नजर है। Reuters के अनुसार दोनों पक्ष संबंधों में स्थिरता चाहते हैं, लेकिन व्यापार, तकनीक, ताइवान और रणनीतिक खनिजों पर मतभेद अभी कायम हैं। इसलिए वॉशिंगटन में शी का भव्य स्वागत जितना दिखाई दे रहा है, उसके पीछे बातचीत का असली दबाव कहीं ज्यादा गहरा है। ट्रंप के सामने सवाल सिर्फ चीन से कितना व्यापार करना है, यह नहीं है; सवाल यह भी है कि अमेरिकी उद्योग और रक्षा क्षेत्र को चीन की रेयर-अर्थ सप्लाई पर कितनी निर्भरता रखनी है।
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