
देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन के फैसले को लेकर प्रदेश सरकार को भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यह विरोध मुख्यत: तीर्थ पुरोहितों की ओर से हो रहा है जिसे कांग्रेस और अन्य दलों का भी समर्थन मिल रहा है। उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने 27 नवंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों के चार धामों सहित राज्य के 50 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के संचालन के लिये चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन को अपनी मंजूरी दी थी ।
बडे आंदोलन कि धमकी
बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के अतिरिक्त उत्तराखंड में मौजूद 47 अन्य मंदिर भी बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आएंगे। इस फैसले से सरकार की कोशिश है कि इन मंदिरों की व्यवस्था और संचालन बेहतर तरीके से हो। लेकिन फैसला आने के बाद पूरे गढवाल क्षेत्र में तीर्थ पुरोहितों ने इसका विरोध शुरू हो गया है। तीर्थ पुरोहितों ने सरकार को चेताया है कि श्राइन बोर्ड विधेयक उनकी सहमति लिये बिना चार दिसंबर से होने वाले विधानसभा सत्र में न लाया जाये अन्यथा इससे राज्य में एक बडे आंदोलन की शुरूआत होगी ।
पुरोहितों के हकों का दमन नहीं होगा
उन्होंने संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक से भी मुलाकात कर अपना पक्ष रखा है और उन्हें बताया है कि इस संबंध में एक समिति का गठन किया है जो आंदोलन की रूपरेखा तय करेगा। तीर्थ पुरोहितों की संस्था के संयोजक सुरेश सेमवाल ने कहा कि तीर्थ पुरोहितों के हकों का दमन नहीं होने दिया जायेगा। तीर्थ पुरोहितों ने उत्तरकाशी, कर्णप्रयाग तथा अन्य जगहों पर आज सरकार के खिलाफ अपना प्रदर्शन जारी रखा और कई जगह उसका पुतला भी फूंका।
इस बीच, मुख्य विपक्षी कांग्रेस तथा एक अन्य प्रमुख क्षेत्रीय दल उक्रांद ने तीर्थ पुरोहितों को अपना खुला समर्थन दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि उनकी पार्टी तीर्थ पुरोहितों के हक के लिए पूरी तरह से अपना समर्थन देगी। इसी तरह, उक्रांद ने चारधाम श्राइन बोर्ड के गठन को लेकर चार दिसंबर को प्रदेश भर में आंदोलन का ऐलान किया है।
(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)
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