अपने निजी खर्च पर शहीदों की 1300 मूर्तियों के वाले पूर्व MLA, अब लगवाएंगे स्वतंत्रता सेनानियों की स्टेच्यू

Published : Jul 07, 2022, 01:09 PM ISTUpdated : Jul 07, 2022, 01:11 PM IST
अपने निजी खर्च पर शहीदों की 1300 मूर्तियों के वाले पूर्व MLA, अब लगवाएंगे स्वतंत्रता सेनानियों की स्टेच्यू

सार

राजस्थान के  झुंझुनु में देश के प्रति समर्पित शहीदों के सम्मान में जिले के  नीमकाथाना पूर्व विधायक प्रेमसिंह बाजौर ने मूर्ति लगाने का जिम्मा उठाया है। वे ये सब अपने निजी खर्च से करते है।

झुंझुनूं. देश के लिए जान न्योछावर करने वाले शहीदों की मूर्ति अपने स्तर पर लगवाने वाले सैनिक कल्याण सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष व नीमकाथाना के पूर्व विधायक प्रेमसिंह बाजौर ने अब अपने निजी खर्च पर फ्रीडम फाइटर्स की मूर्तियां लगवाने को बीड़ा भी उठाया है। जिसकी शुरुआत उन्होंने झुंझुनूं जिले के बाकरा गांव से की है। जहां स्वतंत्रता सेनानी श्योलाल खींचड़ की मूर्ति का अनावरण किया गया है। खास बात ये भी है कि एक से डेढ लाख रुपये की कीमत वाली मूर्तियों का निर्माण करवाने के साथ बाजौर इनके अनावरण समारोह का भी खर्च उठा रहे हैं। गौरतलब है कि बाजौर देश के लिए मर मिटने वाले शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों को सार्वजनिक मंच से देवताओं की उपमा दे चुके हैं।

पहले लिया शहीदों की मूर्ति का संकल्प
प्रेम सिंह बाजौर ने पहले प्रदेश में सैनिकों की मूर्तियां उनके गांव में लगाने का संकल्प लिया था। जिसके तहत प्रदेश में अब तक 522 शहीदों की मूर्तियां लग चुकी है। जबकि करीब 700 से ज्यादा मूर्तियां लगना प्रस्तावित है। जिसके लिए करीब 35 करोड़ रुपये का खर्च बाजौर खुद उठा रहे हैं। इसी के साथ बाजौर ने अब स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्ति भी अपने स्तर पर लगवाने का संकल्प और लिया है। जिसकी भी शुरुआत कर दी गई है।

झुंझुनूं में ही बन रही मूर्तियां
बाजौर मूर्तियों की निर्माण राजस्थान के झुंझुनूं जिले में ही करवा रहे हैं। जहां  खुडानिया निवासी मूर्तिकार वीरेंद्र सिंह शेखावत शहीदों व स्वतंत्रता सेनानियों को मूर्त रूप देने में जुटे हुए हैं। शेखावत ने बताया कि वे अब तक 900 से ज्यादा शहीदों की मूर्तियां तैयार कर चुके हैं। अब बाजौर ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियां बनाने के निर्देश भी दिए हैं। जिसके तहत मूर्ति निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है।

शहीद परिवारों से ही मिली प्रेरणा
बाजौर को शहीद प्रतिमा की प्रेरणा भी झुंझुनूं जिले से ही मिली थी। जहां  धनूरी गांव में सरकार के शहीद सम्मान यात्रा के दौरान जब उन्हें 1999 से पहले के करीब 1300 शहीदों की मूर्तियां नहीं होना खोला तो उन्होंने ऐसे सभी शहीदों की प्रतिमाएं अपने खर्चे से बनवाने की घोषणा कर दी। तब से वह लगातार शहीदों की मूर्ति स्थापना के कार्य में जुटे हैं। गौर हो कि बाजौर ने 2017 में 14 महीने में 29 जिलों में एक लाख किलोमीटर का सफर तय कर शहीद सम्मान यात्रा निकाली थी।

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