
रिलेशनशिप। प्यार का रिश्ता हो या शादी का, हर सबंध पर टेक्नोलॉजी हावी हो चुकी है। इसका बहुत बुरा असर संबंधों पर पड़ रहा है। टेक्नोलॉजी के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल ने हर तरह के रिश्तों में जहर घोलना शुरू कर दिया है। यह टेक्नोलॉजी का ही गलत असर है कि जितनी जल्दी प्यार नहीं होता, उतनी जल्दी खत्म भी हो जाता है। लोग अब एक-दूसरे से मिल कर बातें करना नहीं चाहते, वे टेक्स्ट मैसेज, वॉइस मैसेज और वॉट्सऐप के जरिए संपर्क रखना ज्यादा पसंद करने लगे हैं। ऐसी स्थिति में संबंधों में दूरियां तो आएंगी ही। जानते हैं, टेक्नोलॉजी के ज्यादा इस्तेमाल से संबंधों पर किस तरह पड़ता है बुरा असर।
1. समर्पण की भावना नहीं
आज के समय में पार्टनर्स में एक-दूसरे के प्रति समर्पण की भावना कम ही देखी जाती है। नए जनरेशन के लोग प्यार और संबंधों को गहराई से नहीं लेते। वे जितनी जल्दी प्यार के बंधन में बंधते हैं, कोई मामूली समस्या आने पर उतनी ही जल्दी उसे तोड़ भी देते हैं। इसके पीछे टेक्नोलॉजी की भूमिका अप्रत्यक्ष तौर पर है, जिससे उनकी संवेदनशीलता कम हुई है।
2. खुशी के मायने कुछ और
नए जमाने के लोगों के लिए रिश्ते और उनसे मिलने वाली खुशी के मायने भी बदल गए हैं। उनके लिए बस पल भर की खुशी ही मायने रखती है, बाकी बातों से उन्हें ज्यादा लेना-देना नहीं। वे ऐसे साथी की तलाश में रहते हैं, जिनके साथ वे कुछ समय तक एन्जॉय कर सकें। स्थायी संबंध बनाने और उसे निभाने में उनकी रुचि कम ही होती है।
3. धैर्य की कमी
नयी पीढ़ी के लोगों में धैर्य की कमी काफी देखने को मिलती है। उनके लिए पैसा और सुख-सुविधा की चीजें ही सबसे ज्यादा मायने रखती हैं, न कि रिलेशनशिप। अक्सर वे अपना ज्यादातर समय तरह-तरह के गैजेट्स के यूज में ही बिताते हैं। ऐसे में, उन्हें संबंध बनाने और उन्हें निभाने का समय कम ही मिल पाता है।
4. परफेक्शन की चाह
नई पीढ़ी की एक खासियत यह भी है कि वे हर चीज में अपने हिसाब से परफेक्शन की उम्मीद रखते हैं, जो खासकर संबंधों के मामले में संभव नहीं है। परफेक्शन से उनका मतलब होता है कि जैसा वे चाहें। साफ है, वे कोई भी रिश्ता अपनी शर्तों पर बनाना चाहते हैं। इससे जल्दी ही उनका अलगाव हो जाता है।
5. जल्दी तोड़ देते संबंध
आज की पीढ़ी के ज्यादातर लोगों को संबंध तोड़ने में जरा भी देर नहीं लगती। इसकी वजह है कि गैजेट्स के इस्तेमाल से वे यथार्थ की दुनिया से कट जाते हैं और कल्पना की दुनिया में जीने लगते हैं। इससे उनमें संवेदनशीलता की कमी होती चली जाती है। उनके लिए किसी रिश्ते को तोड़ देना ज्यादा मायने नहीं रखता।
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