Navratri Vrat Parana 2026: नवरात्रि व्रत का पारणा कब करें, 19 या 20 अक्टूबर? जानें विधि और नियम

Published : Oct 18, 2026, 03:33 PM IST
Navratri Vrat Kaise Khole

सार

Navratri Vrat Parana Vidhi: बहुत से लोग शारदीय नवरात्रि का व्रत करते हैं। नवरात्रि समापन के बाद इसका पारणा किस दिन करें और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। ये बात बहुत कम लोगों को पता है। आगे जानिए शारदीय नवरात्रि 2026 के पारणा से जुड़ी खास बातें…

Navratri Vrat Kaise Khole: इस बार शारदीय नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। इस दौरान मां दुर्गा के भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के आखिरी दिनों में कन्या पूजन, हवन और व्रत के पारणा का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार नवमी तिथि 19 और 20 अक्टूबर यानी 2 दिन रहेगी। ऐसे में व्रत का पारणा कब करना चाहिए, इसे लेकर लोगों के मन में सवाल है।

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नवरात्रि व्रत का पारणा कब करें, 19 या 20 अक्टूबर?

पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 बजे शुरू होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे समाप्त होगी। नौ दिनों तक व्रत रखने वाले श्रद्धालु नवमी पूजा पूरी करने के बाद पारणा कर सकते हैं। इसके लिए शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद है। वहीं, कई परिवारों में अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार पारणा करें।

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नवरात्रि व्रत का पारणा कैसे करें?

- नवरात्रि व्रत का पारणा करने से पहले मां दुर्गा की पूजा करें। इसके लिए इन बातों का ध्यान रख सकते हैं।
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें।
- मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं और फूल, फल, मिठाई आदि अर्पित करें।
- मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।
- यदि आपके घर में कन्या पूजन की परंपरा है, तो कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें उपहार या दक्षिणा दें।
- हवन करने की परंपरा हो, तो विधि के अनुसार हवन और पूर्णाहुति करें।
- पूजा पूरी होने के बाद मां दुर्गा को भोग लगाएं और प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलें।
- ध्यान रखें कि पूजा, कन्या पूजन और पारणा का क्रम अलग-अलग परिवारों में अलग हो सकता है।

व्रत खोलते समय किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्रि का व्रत खोलते समय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना अच्छा रहता है। फल, दही, दूध या घर में बना हल्का भोजन अपनी व्रत परंपरा के अनुसार खा सकते हैं। लंबे समय तक भूखे रहने के बाद एक साथ बहुत ज्यादा खाना खाने से बचें और पर्याप्त पानी पिएं। अगर आपने नौ दिनों तक निर्जला व्रत रखा है या कमजोरी महसूस हो रही है, तो भोजन धीरे-धीरे शुरू करें।


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इस आर्टिकल में जो जानकारी है, वो धर्म ग्रंथों, विद्वानों और ज्योतिषियों से ली गईं हैं। हम सिर्फ इस जानकारी को आप तक पहुंचाने का एक माध्यम हैं। यूजर्स इन जानकारियों को सिर्फ सूचना ही मानें।

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